नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की ताकत, सुभारती में स्वास्थ्य वॉक से जागरूकता का संदेश
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें स्वस्थ, सक्रिय एवं नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के शारीरिक शिक्षा विभाग एवं महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ द्वारा “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” के अंतर्गत स्वास्थ्य वॉक/रन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को नशे से होने वाले नुकसान की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवनशैली के प्रति व्यवहारिक रूप से प्रेरित करना भी रहा। स्वास्थ्य वॉक/रन के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि मजबूत और स्वस्थ युवा ही देश के विकास की आधारशिला हैं। प्रतिभागियों ने नशे से दूरी, नियमित व्यायाम, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संकल्प भी व्यक्त किया। इस अवसर पर सुभारती विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो.(डॉ.) मुनिश सी.रेड्डी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को अपने दैनिक जीवन में नियमित शारीरिक व्यायाम और स्वस्थ आदतों को शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शारीरिक सक्रियता न केवल शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता को भी बढ़ाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को नशीले एवं व्यसनी पदार्थों से पूरी तरह दूर रहने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि युवा अवस्था जीवन के निर्माण की अवस्था है। इस दौरान अपनाई गई आदतें भविष्य की दिशा तय करती हैं। इसलिए युवाओं को क्षणिक आकर्षण के बजाय ऐसे जिम्मेदार विकल्प चुनने चाहिए, जो उन्हें स्वस्थ, आत्मनिर्भर और उत्पादक भविष्य की ओर ले जाएं।
जागरूकता संवाद के दौरान फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज के डीन प्रो. (डॉ.) सुधीर त्यागी ने विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशे से दूर रहने के महत्व के प्रति जागरूक किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्वस्थ शरीर और सकारात्मक सोच युवाओं की सबसे बड़ी शक्ति है। नशे की आदत व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करने के साथ उसके परिवार और सामाजिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
प्रो. (डॉ.) अनोज राज, विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग ने मादक एवं नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि नशे की शुरुआत अक्सर छोटी आदत के रूप में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यक्ति के स्वास्थ्य, व्यवहार, शिक्षा, करियर और सामाजिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने युवाओं से नशे के प्रति स्पष्ट और दृढ़ ‘नहीं’ का दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
प्रो. लुभान सिंह ने फार्मास्यूटिकल दृष्टिकोण से नशे की समस्या को समझाते हुए इसके मानव शरीर और समग्र स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि नशीले पदार्थ शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित करने के साथ मानसिक एवं शारीरिक निर्भरता की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं। इससे व्यक्ति की सामान्य जीवनचर्या और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।
वहीं डॉ. मंजू, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी ऑफ एजुकेशन ने नशे के कारण शारीरिक फिटनेस, खेल प्रदर्शन तथा युवाओं की प्रतिभा और संभावनाओं पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ऊर्जा हैं और नशे जैसी बुराइयां उनकी क्षमता को कमजोर करती हैं। खेल, व्यायाम और सकारात्मक गतिविधियां युवाओं को स्वस्थ रखने के साथ उनकी ऊर्जा को सही दिशा भी प्रदान करती हैं।
जागरूकता संवाद के बाद स्वास्थ्य वॉक/रन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और आंतरिक मार्गों से गुजरते हुए विद्यार्थियों ने ‘नशामुक्त युवा–स्वस्थ भारत’ का संदेश दिया। उत्साह से भरे प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य, फिटनेस और नशामुक्त जीवन के प्रति जागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। स्वास्थ्य वॉक/रन ने विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और विषयों के विद्यार्थियों को एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट किया। विद्यार्थियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी के माध्यम से यह संदेश दिया कि नशामुक्त समाज के निर्माण में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत किया।
कार्यक्रम का समापन फैकल्टी ऑफ एजुकेशन में हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशीले पदार्थों से दूर रहने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में शिक्षकों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में फैकल्टी ऑफ एजुकेशन एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) का विशेष योगदान रहा। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित यह स्वास्थ्य वॉक/रन न केवल एक शारीरिक गतिविधि रही, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का प्रभावी संदेश भी दे गई।
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