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Monday, October 5, 2026

सुभारती में अंबेडकर व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ, विद्यार्थियों को दिया ‘शिक्षित बनो’ का संदेश

 


सामाजिक समानता के बिना राजनीतिक समानता अधूरी : अंबेडकर के विचारों पर मंथन


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान में डॉ. बी. आर. अंबेडकर पर केंद्रित व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को डॉ. अंबेडकर के विचारों, सामाजिक न्याय, शिक्षा, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों से परिचित कराना तथा उनके विचारों को समकालीन संदर्भों में समझने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम का आयोजन सुभारती विधि संस्थान के निदेशक जस्टिस राजेश चंद्र, पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, उत्तर प्रदेश के निर्देशन तथा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, संकायाध्यक्ष, सुभारती विधि संस्थान के मार्गदर्शन में किया गया।


कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) प्रेम चंद्र ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने संस्थान में संचालित अंबेडकर चेयर का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए डॉ. बी. आर. अंबेडकर के विचारों और सामाजिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बहुविषयक शोध के क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। हिंदू कोड बिल के संदर्भ में डॉ. अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक समानता के साथ सामाजिक समानता भी आवश्यक है। अंबेडकर चेयर के चेयरपर्सन प्रो. (डॉ.) अनोज राज ने डॉ. अंबेडकर के जीवन-संघर्ष और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए उनके महत्वपूर्ण योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत में हुए राजनीतिक एवं सामाजिक परिवर्तनों की चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को संविधान और सामाजिक न्याय की मूल भावना को समझने का संदेश दिया।


इस अवसर पर निदेशक जस्टिस राजेश चंद्र, पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अंबेडकर चेयर के उद्देश्यों और उसकी शैक्षणिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से डॉ. अंबेडकर के संदेश “शिक्षित बनो” को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बनती है। उन्होंने विद्यार्थियों को एकजुट रहने, नियमित रूप से पुस्तकालय का उपयोग करने तथा अंबेडकर चेयर के अंतर्गत आयोजित विभिन्न शैक्षणिक एवं शोधपरक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को डॉ. अंबेडकर के विचारों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उन्हें सामाजिक एवं राष्ट्रीय जीवन में व्यावहारिक रूप से अपनाने का संदेश दिया गया। व्याख्यान श्रृंखला को विद्यार्थियों में संविधान, सामाजिक न्याय, समानता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता रही।

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