Friday, September 4, 2026

शहीद मंगल पांडे राजकीय महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय ऑनलाइन FDP का शुभारंभ



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। मुख्य संरक्षक प्रो. मोनिका सिंह, निदेशक उच्च शिक्षा उत्तर प्रदेश तथा महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. अंजू सिंह के संरक्षण में शहीद मंगल पांडे राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, मेरठ के आंतरिक गुणवत्ता निर्धारण प्रकोष्ठ (IQAC) एवं न्यूक्लियस ऑफ लर्निंग एंड डेवलपमेंट के संयुक्त तत्वावधान में एमओयू के तहत राष्ट्रीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ किया गया। सात दिवसीय FDP का विषय “ई-कंटेंट विकास, ऑनलाइन शिक्षा एवं मूल्यांकन तथा वर्चुअल कक्षा प्रबंधन : अवधारणाएँ, उपकरण एवं श्रेष्ठ अभ्यास” है। पहले दिन का सत्र रात्रि 8:00 बजे से 9:00 बजे तक आयोजित हुआ।


प्राचार्या ने किया स्वागत

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. अंजू सिंह ने स्वागत उद्बोधन से किया। उन्होंने कहा कि आज के बदलते शैक्षिक परिवेश में डिजिटल तकनीक केवल शिक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और पहुँच को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है। ई-कंटेंट निर्माण, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल मूल्यांकन तथा वर्चुअल कक्षा प्रबंधन जैसे विषय वर्तमान समय में प्रत्येक शिक्षक के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रासंगिक हैं। इस FDP के माध्यम से सभी प्रतिभागियों को नवीन तकनीकों को समझने और अपने शिक्षण में अपनाने का अवसर मिलेगा।


ई-कंटेंट पर विशेषज्ञ व्याख्यान

प्रथम सत्र में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में डॉ. विकास राजपोपट, सहायक प्राध्यापक, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ने ‘ई-कंटेंट विकास’ विषय पर व्याख्यान दिया।उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल पारंपरिक व्याख्यान पर्याप्त नहीं हैं। विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए ऐसी सामग्री विकसित करना जरूरी है जो सरल, आकर्षक, विषय-केंद्रित, संवादात्मक और विद्यार्थियों की गति के अनुरूप हो। डॉ. राजपोपट ने बताया कि ई-कंटेंट का उद्देश्य विद्यार्थियों को किसी भी विषय को कभी भी, कहीं भी सीखने का अवसर देना है। यह ऑनलाइन, मिश्रित और स्व-अध्ययन आधारित शिक्षा में विशेष रूप से उपयोगी है। ई-कंटेंट में केवल लिखित नोट्स ही नहीं बल्कि पीडीएफ नोट्स, ई-पुस्तकें, वीडियो लेक्चर, ऑडियो लेक्चर, पॉडकास्ट, प्रेजेंटेशन, इन्फोग्राफिक्स, एनिमेशन, स्क्रीन रिकॉर्डिंग, ऑनलाइन क्विज, चर्चा मंच और असाइनमेंट आदि शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अच्छी ई-कंटेंट तकनीक-प्रधान होने के साथ-साथ शिक्षण-उद्देश्य आधारित भी होनी चाहिए और इसमें भाषा की सरलता और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने रेखांकित किया कि ई-कंटेंट शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि शिक्षण को प्रभावी बनाने वाला माध्यम है। डिजिटल युग में शिक्षक को सामग्री-निर्माता, मार्गदर्शक और सीखने की प्रक्रिया के सहायक की भूमिका निभानी होगी।


कार्यक्रम के अंत में प्रो. गीता चौधरी ने सभी आयोजकों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. लता कुमार रहीं। इस FDP में देशभर से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।

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