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Tuesday, September 29, 2026

रूस की लोकसंस्कृति, संगीत और परंपराओं से रूबरू हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विद्यार्थी



तीन दिवसीय ‘रशियन पैटर्न्स’ महोत्सव का भव्य शुभारंभ, मिनिन विश्वविद्यालय के कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां


मितेंद्र कुमार गुप्ता

नित्य संदेश, मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में मंगलवार को रूसी भाषा एवं संस्कृति को समर्पित तीन दिवसीय ‘रशियन पैटर्न्स’ (Russian Patterns) महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। यह महोत्सव ‘माई हिस्ट्री’ फाउंडेशन तथा कोज्मा मिनिन निज़नी नोवगोरोड स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी, रूस द्वारा भारत में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को रूसी संघ के शिक्षा मंत्रालय का सहयोग प्राप्त है।


कार्यक्रम का शुभारंभ भारत और रूस के राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके पश्चात चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला तथा मिनिन विश्वविद्यालय, रूस की उप-कुलपति सहित गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर रूस से आए वरिष्ठ प्रोफेसरों, कलाकारों एवं प्रतिनिधिमंडल का विश्वविद्यालय परिवार की ओर से गर्मजोशी से स्वागत किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रूस से आईं एल.वी. एरुश्किना ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए सहयोग और आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन भारत और रूस के बीच शैक्षिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने रूसी भाषा और संस्कृति को भारतीय युवाओं तक पहुंचाने तथा दोनों देशों के विद्यार्थियों के बीच संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।


इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक महोत्सव नहीं, बल्कि भारत और रूस की दो समृद्ध सभ्यताओं के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि किसी देश को केवल पुस्तकों के माध्यम से समझना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी भाषा, साहित्य, संगीत, कला और परंपराओं से परिचित होना भी आवश्यक है। ‘रशियन पैटर्न्स’ महोत्सव विद्यार्थियों को रूस को पाठ्यपुस्तकों से बाहर समझने तथा उसकी संस्कृति से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि भाषा संस्कृति और सभ्यता को जोड़ने वाला सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजन कक्षा को संस्कृति से, शोध को समाज से, भाषा को मित्रता से और विश्वविद्यालयों को राष्ट्रों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महोत्सव से विद्यार्थियों में रूसी भाषा एवं संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ेगी और भारत-रूस के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला के वक्तव्य का रूसी भाषा में अनुवाद फॉरेन लैंग्वेज के डॉ. प्रीतीश कुमार द्वारा किया गया। इससे रूस से आए अतिथियों और कलाकारों को कुलपति के विचारों को उनकी भाषा में समझने का अवसर मिला।


रूसी कलाकारों ने प्रस्तुत किया रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम

उद्घाटन समारोह के बाद कोज्मा मिनिन निज़नी नोवगोरोड स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी, रूस से आए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के कलाकार दल ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। रूसी लोकगीतों, नृत्यों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों से सजी प्रस्तुतियों ने सभागार में उपस्थित दर्शकों को रूस की लोकसंस्कृति से सीधे जोड़ दिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध रूसी लोकगीत ‘डाउन द वोल्गा रिवर’ से हुई। इसके बाद ‘यंग लेडीज एंड द हूलिगन’ नृत्य और ‘गोल्डन-डोम्ड मॉस्को’ गीत ने दर्शकों को रूसी सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई। कलाकारों ने पारंपरिक परिधान और आकर्षक नृत्य शैली के माध्यम से रूसी लोकजीवन को जीवंत कर दिया।


‘रशियन बूट्स’ गीत और प्रसिद्ध ‘कालिंका’ नृत्य पर कलाकारों की प्रस्तुति ने विशेष उत्साह का वातावरण बनाया। इसके बाद ‘आई विल स्टेप आउट इनटू द स्ट्रीट’ और ‘माई जॉय लिव्स देयर’ जैसे गीतों ने रूसी लोक एवं रोमांटिक संगीत की भावनात्मक अभिव्यक्ति को सामने रखा। कार्यक्रम के दौरान रूसी लोक वाद्ययंत्रों की विशेष झलक भी देखने को मिली। कलाकारों ने डफ/टैम्बरीन, लकड़ी के चम्मच तथा बालालाइका जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से रूसी लोकसंगीत की विशिष्ट लय और ध्वनि से दर्शकों को परिचित कराया।


इसके बाद ‘बारिन्या’, ‘काक जा दोनॉम’, ‘रज़ वेचोर’ और ‘आ या पो लुगु’ जैसे गीतों एवं नृत्यों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में और रंग भर दिया। रूस के विस्तृत भूगोल और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाने वाले ‘या लेचू नाड रॉसियेय’ गीत तथा ‘नाम झित ने तुज़ित’ की प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। वहीं ‘रुस्काया उदाल’ के हास्य एवं ऊर्जापूर्ण नृत्य ने दर्शकों का विशेष मनोरंजन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का समापन ‘मातुश्का रॉसिया’ (मदर रशिया) की भव्य सामूहिक प्रस्तुति के साथ हुआ। मंच पर एक साथ आए गायकों और नर्तकों ने अपनी ऊर्जा और शानदार प्रस्तुति से पूरे वातावरण को उत्साह से भर दिया। दर्शकों ने कलाकारों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहवर्धन किया।


रूसी भाषा और संस्कृति पर व्याख्यान एवं कार्यशालाएं

सांस्कृतिक कार्यक्रम के पश्चात महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों द्वारा ‘रूसी लोककथाओं में रूसी संस्कृति की अवधारणाएं’ तथा ‘रूसी संस्कृति को समझने की कुंजी के रूप में गैस्ट्रोनॉमिक इडियम्स’ विषय पर व्याख्यान दिए गए। इसके अतिरिक्त ‘फ्रॉस्ट एंड सन : ए वंडरफुल डे’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें रूसी भाषा की कक्षाओं में अवधारणात्मक विश्लेषण पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों के लिए ‘रशियन फेयरी टेल मैराथन’ नामक इमर्सिव गेम भी आयोजित किया गया, जिसके माध्यम से उन्होंने रूसी लोककथाओं और भाषा को मनोरंजक एवं संवादात्मक तरीके से समझा। 



महोत्सव ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को रूसी भाषा, साहित्य, संगीत, लोकनृत्य, परंपराओं और लोकजीवन को निकट से जानने का अवसर प्रदान किया। रूस से आए कलाकारों एवं शिक्षाविदों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत, ज्ञानवर्धक और यादगार बना दिया। विश्वविद्यालय की ओर से आशा व्यक्त की गई कि ‘रशियन पैटर्न्स’ महोत्सव भारत और रूस के बीच शैक्षिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई ऊर्जा देगा तथा दोनों देशों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच भविष्य में सहयोग के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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