अशोक कुमार
नित्य संदेश, मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामले में प्रभावित व्यापारियों और निवासियों के लिए प्रदेश सरकार जल्द पुनर्वास नीति लाएगी। बुधवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में सांसद अरुण गोविल, राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, कैंट विधायक अमित अग्रवाल और भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी ने यह जानकारी दी।
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि करीब 650 व्यापारियों को आबादी क्षेत्र में लीज पर दुकानें उपलब्ध कराने की योजना तैयार की जा रही है। आचार संहिता के चलते नीति का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन व्यापारियों को नाममात्र किराये पर वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की बात कही गई। राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने बताया कि अवैध निर्माणों से संबंधित मामलों में एमडीए द्वारा पुनः सर्वे कराया जाएगा। वहीं सांसद अरुण गोविल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास के लिए सरकार समाधान की दिशा में कार्य कर रही है और इसके लिए स्थान भी चिन्हित किए जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि क्या है?
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। जिसके तहत आवास विकास परिषद ने अवैध कॉम्प्लेक्स की 22 दुकानें ध्वस्त की थी और शेष 90 दुकानों को खाली कराने का नोटिस दिया था। इसके विरोध में व्यापारी पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर थे।
सांसद अरुण गोविल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात कर धरना खत्म कराया था और 5 बिंदुओं पर सहमति बनी थी -
1. शेष 90 दुकानों पर ध्वस्तीकरण पर रोक
2. मास्टर प्लान में संशोधन कर सेंट्रल मार्केट को 'बाजार स्ट्रीट' का दर्जा देना
3. ध्वस्त 22 दुकानदारों को उसी स्थान पर अस्थायी दुकान लगाने की अनुमति
4. भूखंड 661/6 के स्वामित्व और मानचित्र पर प्राथमिकता से कार्रवाई
5. नगर निगम द्वारा अस्थायी रूप से पट्टे पर दुकान उपलब्ध कराना
इधर सुप्रीम कोर्ट में व्यापारी नेता संजीव मित्तल की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ध्वस्तीकरण पर सीधी राहत नहीं दी, बल्कि राज्य सरकार को पुनर्वास के पहलू पर विचार करते हुए नीति बनाने के निर्देश दिए हैं।
प्रेसवार्ता में भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार व्यापारियों के साथ है। ध्वस्त हुई 22 दुकानों के मालिकों के लिए पुनर्वास, पुनर्स्थापन और अल्पकालिक आर्थिक सहायता का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया है। यह केवल कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि 30-35 साल से रोजगार कर रहे परिवारों के लिए मानवीय संकट है।
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