-हाईकमान को भेजा जाएगा भड़ाना की राजनीतिक विफलता का पूरा चिट्ठा
सलीम सिद्दीकी
नित्य संदेश, मेरठ। भाजपा सांसद रहे ठाकुर अमरपाल सिंह को 1991 में हराकर सुर्खियों में आए अवतार सिंह भड़ाना की मेरठ से फिर नजदीकियां बढ़ने लगी हैं। इससे स्थानीय कांग्रेसी खासे परेशान हैं। सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के साथ सहानुभूति हो या मेरठ के शहर काजी से मुलाकात का मुद्दा हो, इन सबके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अवतार सिंह भड़ाना 2027 के विधानसभा चुनाव में
मेरठ दक्षिण सीट से भाग्य आजमा सकते हैं। उनकी मेरठ दक्षिण क्षेत्र में राजनीतिक
सक्रियता से वो लोग खासे परेशान हैं, जो कांग्रेस के टिकट पर मेरठ दक्षिण से टिकट
के ख्वाहिशमंद हैं। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मेरठ के कुछ वरिष्ठ
कांग्रेसी बाकायदा एक चिट्ठा तैयार कर रहे हैं, जिसमें अवतार सिंह भड़ाना को
मौकापरस्त राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ विफल राजनीतिज्ञ भी दर्शाने की तैयारी है।
वरिष्ठ कांग्रेसियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जो चिट्ठा पार्टी हाईकमान
को भेजा जा रहा है, उसमें 1996 में फरीदाबाद से भाजपा के जाट कैंडिडेट रामचंद्र
बैंदा के हाथों हुई भड़ाना की करारी हार के अलावा 1998 में कांग्रेस द्वारा अवतार
सिंह भड़ाना को टिकट न देने के कारण उनके
पाला बदलकर समाजवादी जनता पार्टी से चुनाव लड़ना और रामचंद्र बैंदा से फिर
डेढ़ लाख वोटों से हार जाना शामिल है। इसके बाद 2014 में भाजपा के कृष्णपाल गुर्जर
से भड़ाना की साढ़े चार लाख वोटों से हुई करारी हार का भी जिक्र है।
11 हजार वोटों से जीती थी मेरठ सीट
हाईकमान को जो रिपोर्ट भेजी जा रही है, उसमें यहां तक कहा गया है कि 2017 में
मुजफ्फरनगर की मीरापुर विधानसभा सीट से भड़ाना ने जो जीत हासिल की थी, वह सिर्फ
193 वोटो के अंतर से हासिल हुई थी। रिपोर्ट में 2019 के चुनाव का भी जिक्र है,
जिसमें अवतार सिंह भड़ाना कांग्रेस के टिकट पर फिर फरीदाबाद से चुनाव लड़े और
कृष्णपाल गुर्जर से 6 लाख 38 हज़ार के अंतर से बुरी तरह हारे। रिपोर्ट में लगे
हाथों यह भी बता दिया गया है कि 1999 में जब भड़ाना मेरठ से सांसद चुने गए थे तो
मात्र 11000 वोटों से ही जीत हासिल की थी।
भाजपाई होने का रिपोर्ट में जिक्र
रिपोर्ट में 2022 में अवतार सिंह भड़ाना द्वारा पाला बदलकर रालोद में जाने और
गौतमबुद्ध नगर की जेवर सीट से सपा-रालोद के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में चुनाव
लड़ने और भाजपा प्रत्याशी धीरेंद्र सिंह से 56 हजार बोटों से हारने का भी जिक्र
है। इसके अलावा 2025 में उनके बेटे अर्जुन भड़ाना द्वारा दिल्ली की बदरपुर सीट से
चुनाव हारने एवं अवतार सिंह भड़ाना के भाई करतार सिंह भड़ाना के भाजपाई होने का भी
रिपोर्ट में खुलकर ज़िक्र किया गया है।
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