Sunday, September 20, 2026

“छात्रों की गूंज” की ऐतिहासिक सफलता ने भाजपा के दुष्प्रचार का दिया करारा जवाब-- जीतू पटवारी

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। 

“छात्रों की गूंज” के ऐतिहासिक आयोजन के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता की उनके साथ पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, शोभा ओझा, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेतिया, इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे, जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े, दीपू यादव, इंदौर नगर निगम नेता प्रतिपक्ष सोनिला मीमरोट, मोती सिंह पटेल, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अमित चौरसिया उपस्थित थे।


पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा की इंदौर की जनता, प्रदेशभर से आए युवाओं, छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों और पत्रकार साथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर से उठी छात्रों की आवाज इंदौर में जनसैलाब बनकर गूंजी है और अब इस आवाज को दबाया नहीं जा सकता।


पटवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने “छात्रों की गूंज” के माध्यम से देश के युवाओं को अपनी बात रखने का मंच दिया। इंदौर के युवाओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक, परीक्षा परिणाम और अपने भविष्य से जुड़े सवालों पर वे चुप बैठने वाले नहीं हैं।


उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस आयोजन को कभी “झूठ की गूंज”, कभी “स्क्रिप्टेड ड्रामा” और कभी “सर्कस” बताने का प्रयास किया, लेकिन इंदौर की जनता और युवाओं ने मैदान में उतरकर इसका जवाब दे दिया। लाखों ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि यह केवल कांग्रेस का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि युवाओं ने इसे अपना मंच माना।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जंतर-मंतर पर युवाओं द्वारा उठाई गई आवाज को बदनाम करने के लिए उन्हें “दिमागी नक्सल” तक कहा गया और आंदोलन पर विदेशी फंडिंग जैसे आरोप लगाए गए। इंदौर में भी आयोजन को लेकर तरह-तरह की रुकावटें खड़ी की गईं। “झूठ की गूंज” के पोस्टर लगाए गए, परिवहन को प्रभावित करने के आरोप सामने आए और दूर-दराज से आए युवाओं को कड़ी धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर आयोजन स्थल तक पहुंचना पड़ा। लेकिन युवाओं का उत्साह और उनकी आवाज को कोई रोक नहीं सका।


उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं के सवालों का जवाब देना चाहिए, उन्हें रोकने या उनके आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। रास्ते रोके जा सकते हैं, लेकिन युवाओं की आवाज नहीं रोकी जा सकती।


पटवारी ने कहा कि भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब इंदौर के युवाओं ने अपने उत्साह और भागीदारी से दिया है। उन्होंने कहा कि Gen-Z और Gen-Alpha के साथ उनके अभिभावकों की भागीदारी ने यह साबित किया कि शिक्षा और रोजगार केवल छात्रों का नहीं, बल्कि हर परिवार का सवाल है।


उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने युवाओं की इस आवाज को राष्ट्रीय मंच दिया है और अब इंदौर से उठी “छात्रों की गूंज” पूरे देश तक पहुंचेगी।


शिक्षा के सवाल पर भाजपा से सीधा सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस का सवाल आज भी वही है—शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, तो K.G. से P.G. तक शिक्षा मुफ्त और अफोर्डेबल क्यों नहीं हो सकती? गरीब, मध्यमवर्गीय और सामान्य परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए लगातार बढ़ते खर्च का बोझ क्यों उठाना पड़ रहा है?


उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को “झूठ की गूंज” कहने के बजाय भाजपा को इन बुनियादी सवालों के जवाब देने चाहिए। युवाओं ने भाजपा की “झूठ की गूंज” का जवाब अपनी “सच की गूंज” से दिया है।

पत्रकारों के सवाल पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के जवाब


सवाल: भाजपा का आरोप है कि “छात्रों की गूंज” में वास्तविक छात्रों के बजाय कांग्रेस और NSUI के कार्यकर्ताओं को मंच दिया गया। क्या यह कार्यक्रम फर्जी छात्रों का मंच था?


जीतू पटवारी: जंतर-मंतर से उठी छात्रों की आवाज इंदौर में जनसैलाब बनकर गूंजी है। हमने पहले ही कहा था कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वाले छात्रों में से करीब 10 प्रतिशत भी मैदान में आएं तो बड़ी संख्या होगी। अब लाखों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और मैदान में उमड़े युवाओं को पूरा देश देख रहा है। Gen-Z, Gen-Alpha, छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक अपनी इच्छा से पहुंचे—यह कांग्रेस का कार्यक्रम नहीं, युवाओं का अपना मंच था।


सवाल: भाजपा “छात्रों की गूंज” को “झूठ की गूंज” बता रही है। जंतर-मंतर के आंदोलन से लेकर इंदौर के आयोजन तक भाजपा लगातार सवाल उठा रही है, आपका क्या कहना है?


जीतू पटवारी: भाजपा का अहंकार अब युवाओं की आवाज से डरने लगा है। जंतर-मंतर पर युवाओं ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई तो उन्हें कभी “दिमागी नक्सल” कहा गया, कभी आंदोलन पर विदेशी फंडिंग के आरोप लगाए गए। अब इंदौर में युवाओं की भारी मौजूदगी के बाद उसे “झूठ की गूंज” कहा जा रहा है। अगर यह झूठ था तो भाजपा को इसे रोकने और बदनाम करने की इतनी बेचैनी क्यों थी?


सवाल: इंदौर में आयोजन से पहले पोस्टर, परिवहन और प्रशासनिक स्तर पर रुकावटों के आरोप लगाए जा रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आयोजन को रोकने का प्रयास हुआ?


जीतू पटवारी: इंदौर के आयोजन को रोकने के लिए तमाम तरह की रुकावटें खड़ी की गईं। “झूठ की गूंज” के पोस्टर लगाए गए, आयोजन में युवाओं ने उनके पोस्टर फाड़ दिए। बसों और गाड़ियों को रोका गया। दूर-दूर से आए छात्र कड़ी धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर आयोजन स्थल तक पहुंचे। जिस जमीन पर आयोजन हुआ उसका शुल्क हमसे वसूला गया शहर मे अब इस तरह के आयोजन भाजपा का संगठन करेगा तब हम अब भी विकास प्राधिकरण और प्रशासन से पूछेंगे की इनसे कितना शुल्क लिया गया। जिला प्रशासन और पुलिस-प्रशासन ने भी आयोजन को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए। हम प्रशासन की मजबूरी समझते हैं, लेकिन युवाओं के रास्ते रोककर उनकी आवाज नहीं रोकी जा सकती। मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी बचाने की चिंता और युवाओं की आवाज से राजनीतिक बेचैनी—दोनों दिखाई दे रही हैं। लेकिन जंतर-मंतर से उठी आवाज को दबाने की कोशिश का जवाब इंदौर के युवाओं ने दे दिया। रास्ते रोके जा सकते हैं, युवाओं की आवाज नहीं। जिस आयोजन को भाजपा ने “सर्कस” कहा था, उसी में युवाओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अब सर्कस बताने वालों के पास युवाओं की इस भागीदारी का जवाब नहीं है। हमने कोई राजनीतिक तमाशा नहीं किया, हमने युवाओं को मंच दिया और युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की।


सवाल: भाजपा इसे “स्क्रिप्टेड और प्रायोजित ड्रामा” बता रही है। आपका क्या कहना है?


जीतू पटवारी: जिस कार्यक्रम में युवा अपनी समस्याओं और सवालों के साथ स्वतः बड़ी संख्या में पहुंचें, उसे स्क्रिप्टेड कहना भाजपा की हताशा है। बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, शिक्षा और रोजगार युवाओं की वास्तविक समस्याएं हैं—इन समस्याओं की कोई राजनीतिक स्क्रिप्ट नहीं होती।


सवाल: मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा नेताओं का आरोप है कि छात्रों के नाम पर कांग्रेस ने युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की?


जीतू पटवारी: लाखों युवा जब अपनी शिक्षा, रोजगार और भविष्य के सवालों के साथ एक मंच पर आते हैं तो उसे गुमराह करना नहीं, सरकार को आईना दिखाना कहते हैं। सरकार को आरोप लगाने के बजाय युवाओं के सवालों का जवाब देना चाहिए।


सवाल: भाजपा कह रही है कि यह कांग्रेस का राजनीतिक आयोजन था, छात्रों का नहीं?


जीतू पटवारी: मैदान ने इसका जवाब दे दिया है। Gen-Z, Gen-Alpha के साथ उनके अभिभावक भी बड़ी संख्या में पहुंचे। लाखों लोगों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया और युवाओं ने पूरे अभियान को अपना माना। यह किसी संगठन के बुलावे तक सीमित कार्यक्रम नहीं था, यह नई पीढ़ी के सवालों की सामूहिक आवाज थी।


सवाल: आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माता को लेकर मंच से आपत्तिजनक टिप्पणी हुई और राहुल गांधी उस पर हंसते रहे?


जीतू पटवारी: भाजपा छात्रों के मूल सवालों से ध्यान भटकाने के लिए इस मुद्दे को उठा रही है। युवाओं की शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और भविष्य के सवालों का जवाब देने के बजाय पूरे कार्यक्रम को एक अलग विवाद में बदलने की कोशिश हो रही है। राहुल गांधी जी ने युवाओं को सुना है, उनके सवालों को राष्ट्रीय मंच दिया है और “छात्रों की गूंज” को देश की आवाज बनाया है। कुछ समय पहले इसी तरह के मीम और रील्स पर लेख प्रकाशित हुए हैं, जिनमें स्वस्थ लोकतंत्र में व्यंग्य को भी विरोध की एक अभिव्यक्ति माना गया। भाजपा सवालों से बचने के लिए बार-बार भावनाओं का सहारा लेती है। अमेरिका का उदाहरण देने वाले प्रधानमंत्री जी को यह भी देखना चाहिए कि वहां Donald Trump तक पर मीम और राजनीतिक व्यंग्य होते हैं और वे सार्वजनिक रूप से उन पर प्रतिक्रिया भी देते रहे हैं।

आज का युवा किसी नेता को भगवान मानकर नहीं, शिक्षा, रोजगार और अपने भविष्य के सवालों के जवाब के लिए मंच पर देखना चाहता है। “छात्रों की गूंज” इसी बदले हुए युवा भारत की आवाज है।


पत्रकार वार्ता में पूर्व मंत्री  सज्जन सिंह वर्मा,  शोभा ओझा, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेतिया, इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष  चिंटू चौकसे, जिला कांग्रेस अध्यक्ष  विपिन वानखेड़े,  दीपू यादव, इंदौर नगर निगम नेता प्रतिपक्ष सोनिला मीमरोट,  मोती सिंह पटेल, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अमित चौरसिया सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

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