Sunday, September 20, 2026

ई पीढ़ी के ईमान की हिफाज़त के लिए व्यवस्थित मकतब जरूरी: मुफ्ती मुहम्मद अफ्फान



सोशल मीडिया की गैर-प्रामाणिक धार्मिक जानकारी से सावधान रहने, उलेमा से मजबूत संबंध और नई पीढ़ी की दीनी तर्बियत पर जोर


रवि गौतम

नित्य संदेश, परीक्षितगढ़। जमीयत उलेमा मेरठ के तत्वावधान में मस्जिद मुस्तफाई मवाना स्टैंड में समाज सुधार, عقائد की सुरक्षा और दीनी तालीम के प्रसार के उद्देश्य से एक गरिमापूर्ण एवं विचारोत्तेजक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उलेमा-ए-किराम, इमाम-ए-मसाजिद, मदरसों के जिम्मेदारान, जमीयत उलेमा के साथियों एवं समर्थकों तथा बड़ी संख्या में आम लोगों ने भाग लिया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना नबील अहमद साहब ने की, जबकि संचालन मुफ्ती मुहम्मद शादाब साहब ने किया। कार्यक्रम में विशेष संबोधन के लिए हज़रत मौलाना मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान साहब दामत बरकातुहुमुल आलिया, सदर जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश एवं शैखुल हदीस जामे मस्जिद अमरोहा विशेष रूप से तशरीफ़ लाए। कार्यक्रम का आगाज़ कारी मुहम्मद मेहताब साहब दामत बरकातुहुमुल आलिया की पुरअसर तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुआ, जबकि कारी मुहम्मद आसिफ साहब ने बारगाह-ए-रिसालत ﷺ में नात-ए-रसूल-ए-मकबूल ﷺ पेश की। इसके बाद मकतब मुस्तफाई मस्जिद के छात्रों मुहम्मद फ़ज़ल और मुहम्मद आतिफ ने हज़रत मुफ्ती मुहम्मद अफ्फान साहब के सामने अक़ाइद के विषय पर प्रभावशाली संवाद प्रस्तुत किया, जिसे हज़रत वाला और उपस्थित लोगों ने विशेष रुचि के साथ सुना।



अपने महत्वपूर्ण एवं विचारोत्तेजक संबोधन में हज़रत मुफ्ती मुहम्मद अफ्फान साहब ने मुसलमानों के अक़ाइद एवं दीनी पहचान की हिफाज़त, उलेमा से मजबूत संबंध तथा नई पीढ़ी की दीनी तर्बियत की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का एक वर्ग अपने बुनियादी अक़ाइद और दीनी मसाइल से दूर होता जा रहा है, जबकि वर्तमान दौर में दीनी जानकारी हासिल करने के लिए सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।


हज़रत ने सोशल मीडिया और यूट्यूब पर मौजूद गैर-प्रामाणिक दीनी सामग्री से सावधान रहने की ताकीद करते हुए कहा कि केवल इस्लामी नाम या धार्मिक शीर्षक के साथ प्रस्तुत की गई हर बात प्रमाणित नहीं होती। कुछ माध्यमों से ऐसी गैर-प्रामाणिक बातें प्रसारित की जाती हैं, जो उम्मत में वैचारिक भ्रम और दीनी उलझन पैदा कर सकती हैं। इसलिए कुरआन और हदीस, अक़ाइद तथा दीनी मसाइल के संबंध में प्रामाणिक उलेमा और अहल-ए-इल्म से रुजू करना जरूरी है।


हज़रत मुफ्ती मुहम्मद अफ्फान साहब ने व्यवस्थित मकतबों की अहमियत पर विशेष रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि मसाजिद में मकतबों का सिलसिला अल्हम्दुलिल्लाह जारी है, लेकिन यदि उन्हें नियमित व्यवस्था, शैक्षिक क्रम, निगरानी और प्रशिक्षण व्यवस्था के साथ व्यवस्थित किया जाए तो उनके परिणाम अधिक प्रभावी और स्थायी हो सकते हैं।


हज़रत ने मकतबों को नई पीढ़ी के ईमान, अक़ाइद, इबादत और अच्छे अख़लाक की मजबूत बुनियाद बताते हुए कहा कि बच्चों की दीनी तर्बियत को केवल नाज़िरा कुरआन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें बुनियादी अक़ाइद, जरूरी मसाइल, नमाज़, इस्लामी आदाब और अच्छे अख़लाक की भी शिक्षा दी जाए। उन्होंने समाज सुधार के लिए मकतबों को प्रभावी बनाने तथा उनकी शैक्षिक एवं प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।


संबोधन के दौरान उलेमा-ए-किराम से मजबूत संबंध और दीनी मसाइल में अहल-ए-इल्म से रुजू करने की अहमियत भी बयान की गई। हज़रत ने कहा कि आज जानकारी के बहुत से माध्यम मौजूद हैं, लेकिन सही दीनी मार्गदर्शन के लिए प्रामाणिक उलेमा से संबंध और उनसे लाभ उठाने की अहमियत आज भी बुनियादी है।


कार्यक्रम के समापन पर कारी मुहम्मद वासिफ साहब, सदर दीनी तालीमी बोर्ड जमीयत उलेमा जिला मेरठ एवं इमाम मुस्तफाई मस्जिद ने हज़रत मुफ्ती मुहम्मद अफ्फान साहब, सदर-ए-जलसा मौलाना नबील अहमद साहब, नाज़िम-ए-कार्यक्रम मुफ्ती मुहम्मद शादाब साहब तथा कार्यक्रम में तशरीफ़ लाने वाले तमाम उलेमा, इमाम, मदरसों के जिम्मेदारान, जमीयत के साथियों एवं समर्थकों और आम लोगों का दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा किया।


कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख लोग

कार्यक्रम में मौलाना अनीस अहमद साहब, हाफिज मुहम्मद गुलज़ार साहब, मौलाना मुहम्मद खालिद साहब, मौलाना तसव्वुर साहब, हाफिज मुहम्मद सलीम साहब, कारी मुर्तज़ा साहब, हाफिज बाक़र अली साहब, हाजी सईद अहमद साहब, मौलाना नफ़ीस अहमद साहब, काज़ी तहसील मवाना, मौलाना मुफ्ती असलम साहब, मौलाना अब्दुल्लाह साहब, मुफ्ती साजिद साहब, मौलाना रागिब साहब, हाफिज मस्रूर साहब और मौलाना असरार साहब सहित आसपास के मदरसों के जिम्मेदारान, इमाम-ए-मसाजिद, उलेमा-ए-किराम, जमीयत उलेमा के साथी तथा बड़ी संख्या में आम लोग मौजूद रहे। अंत में हज़रत मौलाना मुफ्ती मुहम्मद अफ्फान साहब दामत बरकातुहुमुल आलिया की दुआ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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