-ओडीओसी वित्तपोषण सहायता योजना से पारंपरिक कारोबार को मिलेगा विस्तार का अवसर
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मेरठ की पहचान उसके औद्योगिक उत्पादों के साथ-साथ रेवड़ी और गजक जैसे
पारंपरिक स्वाद के लिए भी है। अब इस स्थानीय कारोबार को बड़े उद्योग का स्वरूप
देने और कारोबारियों को विस्तार के लिए पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार
ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के
माध्यम से संचालित एक जनपद एक व्यंजन (ओडीओसी) वित्तपोषण सहायता योजना के तहत
रेवड़ी-गजक कारोबार से जुड़े उद्यमी नए प्रतिष्ठान स्थापित करने के साथ मौजूदा
इकाई का विस्तार कर सकेंगे। योजना में परियोजना लागत के आधार पर आकर्षक सब्सिडी का
प्रावधान है, जो अधिकतम 50 लाख रुपये तक हो सकती है।
इस पहल से मेरठ के पारंपरिक कारोबारियों को अपने छोटे व्यवसाय को आधुनिक
उत्पादन इकाई में बदलने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार का विस्तार करने का अवसर
मिलेगा। योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के
साथ जिले के विशिष्ट उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है। योजना का लाभ लेने
के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता नहीं रखी गई है। यानी रेवड़ी और
गजक के पारंपरिक कारोबार से जुड़े ऐसे लोग भी आगे बढ़ सकते हैं, जिनके पास उच्च
शैक्षणिक योग्यता नहीं है। आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। योजना का
लाभ आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य को केवल एक बार दिया जाएगा। साथ ही आवेदक
या उसके परिवार के सदस्य ने पहले किसी अन्य सरकारी स्वरोजगार योजना का लाभ न लिया
हो, यह भी निर्धारित शर्तों में शामिल है। सरकार की इस व्यवस्था से कारोबारियों के
लिए उद्योग स्थापित करने या मौजूदा इकाई के विस्तार की राह आसान होगी। इससे
उत्पादन बढ़ाने के साथ पैकेजिंग, मशीनरी और कारोबार को संगठित स्वरूप देने की
संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
परियोजना लागत के अनुसार मिलेगी 50 लाख तक सब्सिडी
योजना में परियोजना की लागत के अनुसार अलग-अलग स्तर पर सब्सिडी का प्रावधान
किया गया है। 25 लाख रुपये तक की परियोजना पर लागत का 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 6.25
लाख रुपये, जबकि 25 लाख से 50 लाख रुपये तक की परियोजना पर लागत का 10 प्रतिशत
अथवा अधिकतम 6.25 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। इसी तरह 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये
तक की परियोजना पर लागत का 20 प्रतिशत अथवा अधिकतम 10 लाख रुपये और 1.5 करोड़
रुपये से अधिक की परियोजना पर लागत का 10 प्रतिशत अथवा अधिकतम 50 लाख रुपये तक की
सब्सिडी दी जाएगी।
ये कहना है उपायुक्त उद्योग का
उपायुक्त उद्योग अमरेश कुमार पांडे का कहना है कि योजना में अंशदान की शर्त भी
आसान रखी गई है। सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत
स्वयं लगाना होगा। वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग,
अल्पसंख्यक, महिला और दिव्यांगजन लाभार्थियों के लिए अंशदान केवल पांच प्रतिशत
निर्धारित किया गया है। इससे मेरठ के रेवड़ी-गजक कारोबारियों को पूंजी की कमी दूर
कर कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने का अवसर मिलेगा।

No comments:
Post a Comment