Friday, September 18, 2026

मेडिकल कॉलेज में शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा की गई जटिल सर्जरी

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। मेडिकल कॉलेज के शल्य चिकित्सा विभाग की विशेषज्ञ एचपीबी और जीआई (HPB & GI) यूनिट ने कोरोसिव पदार्थ (एसिड/रसायन) पीने से सिकुड़ी भोजन नली (Esophageal Stricture) से पीड़ित एक महिला नाम नीरू सेनी, उम्र 37 वर्ष, निवासी अमरोहा की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की है। 


इस सर्जरी में पारंपरिक 'इसोफेगेक्टोमी' (भोजन नली निकालने की प्रक्रिया) की बजाय, मरीज की प्राकृतिक भोजन नली को सुरक्षित बचा लिया गया। मरीज अब बिना किसी परेशानी के मुंह से सामान्य आहार (oral diet) ले रही है और उसे स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया है। यह जटिल शल्य चिकित्सा एसआईसी (SIC) डॉ. धीरज राज तथा यूनिट हेड प्रो. (डॉ.) संजीव कुमार के मार्गदर्शन में सहायक आचार्य डॉ. शुभम यादव (MS, DNB) द्वारा की गई। इसमें सीनियर रेज़िडेंट डॉ. आकांक्षा सिंह, डॉ. रवि, रेज़िडेंट डॉ. राजेंद्र, डॉ. ऋषभ, डॉ. आशीष चौधरी और एनेस्थीसिया टीम से डॉ. संगीता का विशेष सहयोग रहा।


पहले इस प्रकार की गंभीर चोट और जटिल शल्य चिकित्सा वाले मरीजों को आगे के उपचार के लिए दिल्ली के उच्च-स्तरीय अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था। लेकिन अब, प्राचार्य प्रो. (डॉ.) आर. सी. गुप्ता के निरंतर सहयोग, प्रोत्साहन और मेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के प्रयासों के परिणामस्वरूप, ऐसी अति-उन्नत (Advanced) सर्जरी एल.एल.आर.एम. मेडिकल कॉलेज, मेरठ में ही सफलतापूर्वक की जा रही हैं। 


इससे स्थानीय मरीजों को महानगरों की दौड़-भाग से मुक्ति मिली है और उन्हें अपने शहर में ही विश्व-स्तरीय उपचार मिल रहा है।


मुख्य उपलब्धि:-

* जटिल और नवीन शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक सम्पन्न; पारंपरिक इसोफेगेक्टोमी (Esophagectomy) को टालते हुए रोगी की प्राकृतिक भोजन नली को सफलतापूर्वक सुरक्षित (Esophageal preservation) रखा गया।

* रोगी की निगलने की क्षमता पूरी तरह से बहाल हुई; बिना किसी नई शिकायत के रोगी को सामान्य मौखिक आहार (Oral Diet) पर स्थिर स्थिति में डिस्चार्ज किया गया।

* बहुविषयक दल-आधारित देखभाल के साथ समयबद्ध ऑपरेशन और बेहतरीन पोस्ट-ऑपरेटिव प्रबंधन किया गया।

भोजन नली की कोरोसिव इंजरी और स्ट्रिक्चर (Esophageal Corrosive Injury & Stricture)

यह एक अत्यंत गंभीर स्थिति है जिसमें किसी ज्वलनशील रसायन के सेवन से भोजन नली जल जाती है और घाव भरने की प्रक्रिया में वह पूरी तरह सिकुड़ (Stricture) जाती है, जिससे रोगी पानी घूंटने में भी असमर्थ हो जाता है।


प्रक्रिया के बारे में

* एसोफेजियल प्रिजर्वेशन/सॉल्वेज (Esophageal Preservation): पारंपरिक इसोफेगेक्टोमी (जिसमें खराब हो चुकी भोजन नली को काटकर निकाल दिया जाता है और पेट या आंत से नई नली बनाई जाती है) के विपरीत, इस उन्नत प्रक्रिया में विशेष सर्जिकल तकनीकों का उपयोग करके रोगी की अपनी प्राकृतिक भोजन नली को ही बचाया गया।

यह एक अत्यंत उच्च-कौशल, चुनौतीपूर्ण और दीर्घ अवधि वाली शल्य प्रक्रिया मानी जाती है, क्योंकि जली हुई और सिकुड़ी हुई भोजन नली को बिना काटे सुरक्षित बचाना एक बहुत ही जटिल कार्य है। रोगी की स्थिति, चोट की गंभीरता और शल्य-विधि की जटिलता के अनुसार इस ऑपरेशन की अवधि कई घंटों तक रह सकती है।

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