(AI निर्मित चित्र)
मनीषा पंवार
नित्य संदेश, चित्तौड़गढ़/इंदौर। धर्म स्थान से लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ घटी एक घटना ने यह साबित कर दिया कि आज के दौर में भी निस्वार्थ ईमानदारी और इंसानियत ज़िंदा है।
श्री सांवरिया सेठ के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालु चंद्रप्रकाश साहू और दिलीप जोशी नीमच रोड स्थित काका चौराहा के 'सांवरिया टी-स्टॉल' पर जलपान के लिए रुके थे। चाय की चुस्कियों और आपसी बातचीत के दौरान दिलीप जोशी अपना कीमती मोबाइल फोन टेबल पर ही भूल गए और इंदौर मार्ग पर लगभग 100 किलोमीटर आगे निकल गए।
काफ़ी दूर जाने के बाद जब फोन का अहसास हुआ, तो उन्होंने अपने मित्र चंद्रप्रकाश साहू के मोबाइल से खुद के नम्बर पर संपर्क किया। चाय की दुकान पर कार्यरत रमेश गिर ने फोन बजते ही सजगता से कॉल उठाया और फोन मालिक को आश्वस्त किया कि उनका मोबाइल पूरी तरह सुरक्षित है। वे पढ़े लिखे नहीं है इसलिए समझकर फोन उठाने में देर लगी है।
श्रद्धालुओं के काफी आगे निकल जाने पर चाय वाले कर्मचारी रमेश गिर ने सूझबूझ दिखाई और कहा, "आप किसी को फोन लेने भेज दीजिए, मैं उन्हें सौंप दूंगा।" उसी रूट पर चंद्रप्रकाश साहू के रिश्तेदार का स्थानीय 'विश्वा स्कूल' स्थित है। चाय विक्रेता रमेश गिर ने स्कूल संस्थापक अजय मदन के सहयोग से मोबाइल को सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने की व्यवस्था की।
यह घटना दर्शाती है कि छोटे शहरों और कस्बों के लोग आज भी कितने ईमानदार और मददगार हैं। दिलीप जोशी और उनके साथियों ने चाय विक्रेता रमेश गिर की इस ईमानदारी और तत्परता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सांवरिया सेठ के दरबार से लौटते समय मिला यह अनुभव दिल को छू लेने वाला है, जो समाज में नैतिक मूल्यों पर विश्वास को और मजबूत करता है।

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