Monday, September 7, 2026

सीसीएसयू में संत रविदास और सामाजिक समरसता पर संवाद कार्यक्रम आयोजित



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर स्थित काशीराम शोधपीठ में रविवार को संत शिरोमणि रविदास एवं सामाजिक समरसता विषय पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी ने की, जबकि संचालन डॉ. मनोज जाटव ने किया।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूर्व केंद्रीय मंत्री व एमएलसी डॉ. संजय पासवान ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन-दर्शन केवल किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए था। उन्होंने समानता, बंधुत्व और मानव गरिमा का संदेश दिया। संत रविदास ने जात-पात और छुआछूत का कड़ा विरोध किया और सभी इंसानों को एक समान माना। उन्होंने एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना की थी जहां किसी को किसी प्रकार का दुख न हो। मानव की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके अच्छे कर्मों से होती है। डॉ. पासवान ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए समता, ममता, रमता, सततता एवं तारतम्यता आवश्यक है।


अध्यक्षता करते हुए डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी ने कहा कि विकसित भारत का सपना बिना सामाजिक समरसता के अधूरा है। जब तक अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंच जाता, तब तक यह परिकल्पना अधूरी है। आज मोदी सरकार अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा में लाकर राष्ट्र निर्माण से जोड़ रही है। सुभारती विश्वविद्यालय के डॉ. मनोज त्रिपाठी ने कहा कि सामाजिक समरसता का संकल्प जाति विहीन समाज की परिकल्पना के बिना अधूरा है। समाज में आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना मजबूत करने से सामाजिक समरसता को नई दिशा मिलेगी।


डॉ. रवि प्रकाश ने संत रविदास के दर्शन, सामाजिक चेतना और समतामूलक समाज की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को संत रविदास के विचारों से जोड़ने की आवश्यकता है। संचालन करते हुए डॉ. मनोज जाटव ने कहा कि शिक्षा और जागरूकता सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम है। नई पीढ़ी यदि समानता, मानवता और राष्ट्र सेवा के मूल्यों को अपनाएगी तो विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।इस अवसर पर प्रो. शैलेंद्र सिंह गौरव, डॉ. अनिल कुमार, प्रशांत कुमार, मदन गौतम शोभापुर, रविंद्र सराय काजी, बिजेंदर सागर, राजेंद्र प्रेमी, विक्रम लिसाड़ी, जतिन लिसाड़ी, सतीश शर्मा, पूर्व पार्षद राकेश शर्मा, उमाशंकर पाल आदि उपस्थित रहे।

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