प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान
नित्य संदेश। लगभग 55 वर्ष की आयु में फोटो जर्नलिस्ट राजन सक्सेना का असामयिक निधन अत्यंत दुखद और झकझोर देने वाली घटना है। मीडिया जगत के लिए यह केवल एक सहकर्मी को खोने का दुःख नहीं, बल्कि पत्रकारों और फोटो जर्नलिस्टों के स्वास्थ्य, जीवनशैली तथा सामाजिक सुरक्षा पर गंभीरता से विचार करने का अवसर भी है।
मेरी जानकारी के अनुसार, राजन सक्सेना को स्ट्रोक हुआ था और वे पिछले कुछ महीनों से पक्षाघात से पीड़ित थे। उनके निधन की व्यक्तिगत चिकित्सकीय परिस्थितियों के बारे में अंतिम निष्कर्ष संबंधित चिकित्सकीय अभिलेखों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। लेकिन स्ट्रोक हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने का महत्वपूर्ण संदेश अवश्य देता है। उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का एक प्रमुख जोखिम कारक है। अत्यधिक नमक का सेवन रक्तचाप बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इससे हृदय रोग तथा स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वयस्कों को प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक का सेवन करना चाहिए। भारत में भी नमक के सेवन को लेकर चिंता का विषय है। एक रिपोर्ट में अध्ययन की गई आबादी में औसत नमक सेवन लगभग 20.0 ग्राम प्रतिदिन पाया गया था—जो WHO की वर्तमान अनुशंसा से काफी अधिक है। इसलिए मेरा संदेश है—नमक कम करें, रक्तचाप नियमित रूप से जांचें और अपनी जीवनशैली को स्वस्थ बनाएं। स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप का प्रभाव केवल मस्तिष्क तक सीमित नहीं रहता। अनियंत्रित उच्च रक्तचाप हृदय, गुर्दे और रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
मीडिया कर्मियों के लिए स्वास्थ्य संदेश
पत्रकार और फोटो जर्नलिस्ट अक्सर अनियमित समय, लगातार यात्रा, तनाव, देर रात तक काम और अनियमित भोजन जैसी परिस्थितियों में काम करते हैं। इसलिए उनके लिए नियमित स्वास्थ्य निगरानी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।मैं सभी मीडिया कर्मियों से आग्रह करता हूं—नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, विशेषकर रक्तचाप, रक्त शर्करा और लिपिड प्रोफाइल की। ताजे और मौसमी फल एवं सब्जियां अपने भोजन का हिस्सा बनाएं। नमक और अत्यधिक नमकीन/प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। पर्याप्त और नियमित नींद लें। अपनी क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करें। धूम्रपान, तंबाकू और अत्यधिक शराब से बचें। देर रात के भारी भोजन और लगातार होने वाली दावतों/अनियमित भोजन से बचने का प्रयास करें। अचानक कमजोरी, चेहरे का टेढ़ापन, बोलने में परेशानी या हाथ-पैर में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लें। एक परिवार की सुरक्षा भी हमारी जिम्मेदारी है
श्री सक्सेना अपने पीछे पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गए। किसी परिवार के लिए कमाने वाले सदस्य को अचानक खो देना केवल भावनात्मक आघात नहीं होता, बल्कि आर्थिक असुरक्षा भी पैदा कर सकता है। यह घटना सरकार, मीडिया संस्थानों और मीडिया हाउस के संचालकों के सामने भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न रखती है—क्या हमारे पत्रकारों और फोटो जर्नलिस्टों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और आपातकालीन सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध है?
सरकार और मीडिया संस्थानों से मेरा अनुरोध है कि मीडिया कर्मियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा तथा आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार के लिए न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा की व्यवस्था को मजबूत किया जाए।राजन सक्सेना की स्मृति में हम केवल शोक न करें—उनके निधन से एक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा का सबक भी लें।
जीवन अनमोल है। स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें।
समय रहते जांच कराएं • रक्तचाप नियंत्रित रखें • नमक कम करें • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान
संस्थापक साइक्लोमैड फिट इंडिया
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