नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। शहर में बार फिर झांकियों के काफिले के स्वागत के लिए तैयार है। शहर में झांकियां निकलने की परंपरा को 103 साल से ज्यादा हो चुके हैं। एक रात निकलने वाली इन झांकियों की तैयारी महीनों पहले शुरू हो जाती है। इस दौरान कलाकार पुतलों के निर्माण, पेंटिंग, सजावट और उनकी मूवमेंट पर लगातार काम करते हैं। स्वदेशी मिल कल्याण मिल नगर निगम इंदौर विकास प्राधिकरण हुकुमचंद मिल राजकुमार मिल खजराना गणेश मंदिर की झांकियां तैयारियों के अंतिम दौर में है ।
बैलगाड़ी के दौर से शुरू हुआ यह सफर अब आधुनिक तकनीक और एआई के दौर तक पहुंच चुका है। साधारण रोशनी से लेकर बड़े जनरेटर और आधुनिक लाइटिंग तक बदलाव हुए, लेकिन कई झांकियों में आज भी हाथ से किए जाने वाले काम को प्राथमिकता दी जाती है।
झांकियों का काफिला भले ही एक रात शहर की सड़कों पर दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे कई महीनों की तैयारी होती है। पुतलों का निर्माण, उनकी पेंटिंग, सजावट और मूवमेंट तय करने में बड़ी संख्या में कलाकार जुटते हैं। तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद कई कलाकार पारंपरिक तरीकों से अपना काम जारी रखे हुए हैं।



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