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Monday, September 21, 2026

मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम विषय पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग में विद्यार्थियों हेतु मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र, मनोविज्ञान विभाग सी सी एस यूनिवर्सिटी मेरठ एवं मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया, मेरठ के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम विषय पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, आत्महत्या से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करना तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर सहायता प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सुश्री प्रिया पाल, परामर्श मनोवैज्ञानिक, मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया ने युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, उनके प्रारंभिक संकेतों तथा उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को कम करने से विद्यार्थियों में सहायता लेने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है और वे अपनी समस्याओं को समय रहते साझा कर सकते हैं।

इस अवसर पर मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष, प्रो. संजय कुमार ने आत्महत्या की गंभीर समस्या पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 14,000 विद्यार्थी आत्महत्या करते हैं तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार युवाओं में आत्महत्या मृत्यु के प्रमुख कारणों में से दूसरा सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति में लगातार उदासी, असहायता की भावना, किसी महत्वपूर्ण चीज या व्यक्ति को खोने का भाव, चिड़चिड़ापन, ऊर्जा में कमी, सामाजिक दूरी बनाने या अकेले रहने की इच्छा जैसे संकेत दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए तथा आवश्यकतानुसार मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

प्रो. संजय कुमार ने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि किसी व्यक्ति की बात को ध्यानपूर्वक सुनना, उसके साथ खड़ा होना और समय पर सहायता तक पहुंचाना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति यह कहता है कि “मेरी कोई आवश्यकता नहीं है”, “मेरे जाने के बाद सब ठीक हो जाएगा”, “मैं मरना चाहता/चाहती हूँ” अथवा “इस दुनिया में मेरे लिए कोई जगह नहीं है”, तो ऐसी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे संकेतों की स्थिति में तत्काल संवेदनशील हस्तक्षेप तथा उपयुक्त मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनोविज्ञान विभाग में मानसिक स्वास्थ्य एवं वेल बीइंग सेंटर वर्ष 2018 , से संचालित है जिसमें कोई भी विद्यार्थी अपनी किसी भी तनाव जनित समस्या जोआकर साझा कर सकता है एवं अपनी किसी भी समस्या का समाधान प सकता है।

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय मनोवैज्ञानिक शिवानी शर्मा एवं सागर तोमर द्वारा किया गया। इस अवसर पर एम.ए. मनोविज्ञान के विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या रोकथाम एवं जागरूकता पर आधारित एक प्रभावशाली लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गई, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को समझने, दूसरों की भावनाओं को गंभीरता से लेने तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए आगे आने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में जंतु विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों सहित मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, भावनात्मक कठिनाइयों तथा आत्महत्या रोकथाम से संबंधित विषयों पर चर्चा की और अपने प्रश्न भी रखे।

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना कमजोरी नहीं, बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। समय पर पहचाने गए संकेत, संवेदनशील संवाद और उचित सहायता किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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