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Thursday, September 10, 2026

नारी शक्ति को परिवार, समाज और राष्ट्र के नव -निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में रेखांकित किया

शाहिद खान 
नित्य संदेश, नई दिल्ली। "स्त्री अनुगूंज : परंपरा, इतिहास और नव - दृष्टि" विषय पर संगोष्ठी अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, दिल्ली प्रांत के महिला इतिहासकारों के सहयोग से किया गया। संगोष्ठी का मौलिक उद्देश्य महिला इतिहासकारों को उन चुनौतियों से रूबरू कराना था ,जो सामयिक परिवेश में चिंतनीय है।


कार्यक्रम में सुश्री उषा द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम अत्यंत प्रभावशाली एवं प्रेरणादाई रहा। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से नारी शक्ति को परिवार, समाज और राष्ट्र के नव -निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में रेखांकित किया। भारतीय संस्कृति में नारी सदैव संस्कार ,सृजन, शक्ति और मार्गदर्शन की प्रतीक रही है। राष्ट्र को नवीन दिशा प्रदान करने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण रही है।नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय पुनर्जागरण का भी सशक्त वाहक रही है। भारतीय संस्कृति के आलोक को पीढी- दर -पीढ़ी आगे बढ़ाने में महिलाओं का योगदान वास्तव में अनुकरणीय है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. बालमुकुंद पांडे, राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना ,केशव कुंज रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास -लेखन एक विषय है, जबकि इतिहास का निर्माण एक कला है।उन्होंने कहा कि," किसी भी समाज के पराधीनता का मूल कारण उसके स्वाभिमान का क्षीण अथवा शून्य हो जाना है।" उन्होंने भारतीय ऐतिहासिक चिंतन परंपरा में नारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि," सृष्टि के उत्पत्ति और उसके विकास में नारी की केंद्रीय भूमिका रही है।"भारतीय चिंतन परंपरा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा में नारी केवल सामाजिक इकाई के रूप में नहीं ,बल्कि दैवीय सत्ता,सृजन की शक्ति और सांस्कृतिक चेतना के आधार के रूप में प्रतिष्ठित है।


डॉ पांडे ने कहा कि ,इतिहास के विभिन्न चरणों में विदेशी आक्रांताओं ने भारतीय समाज की संरचना और विशेष रूप से महिलाओं की सामाजिक स्थिति को अपने प्रभाव के अनुरूप (सांचे) ढालने का प्रयास किया ।अनेक आक्रांताओं के कालखंड में स्त्रियों के प्रति उत्पीड़न और असमानता की स्थितियां देखने को मिलती हैं। इसके विपरीत, भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि में नारी को केवल सामाजिक इकाई के रूप में नहीं ,बल्कि ममत्व , करुणा ,सृजन और शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। भारतीय महिलाओं ने विद्या, इतिहास, ज्ञान,शक्ति, साहित्य ,कला तथा विभिन्न बौद्धिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर समाज और राष्ट्र के विकास को "नई दिशा" प्रदान की है।


डॉ. पांडे ने कहा कि, समकालीन संदर्भ में ' सोशल मीडिया' भी सामाजिक चेतना के निर्माण का एक प्रभावशाली माध्यम बन गया है ,किंतु उसके सकारात्मक उपयोग के साथ-साथ भ्रामक सूचना, अश्लीलता, अनैतिक सामग्री और सांस्कृतिक मूल्यों से विचलित करने वाली प्रवृत्तियों के प्रसार के चुनौती भी सामने आई हैं।' सोशल मीडिया' का अनुप्रयोग विवेक, मर्यादा और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से किया जाए ताकि यह समाज को पथभ्रष्ट करने के बजाय ज्ञान, संस्कार, सामाजिक परिवर्तन एवं सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकें।


उन्होंने कहा कि, इतिहास के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले किंतु अब उपेक्षित एवं अल्प ज्ञात महिलाओं के महनीय योगदान को सामने लाने के लिए इतिहास -लेखन में नवाचार, नवोन्मेष और पुनर्पाठ आवश्यकता है । "विकसित भारत ,2047 "के संकल्प की दृष्टि से महिलाओं के ऐतिहासिक ,सामाजिक, सांस्कृतिक,आर्थिक एवं राष्ट्र- निर्माण संबंधी योगदान का सम्यक अध्ययन न केवल अतीत के प्रति अन्याय होगा, बल्कि भविष्य के भारत की दिशा को भी सुदृढ़ करेगा। ऐसे प्रयास "परमवैभवशाली भारत" के निर्माण की संकल्प -यात्रा में हमारी "सार्थक आहुति" सिद्ध होगी।


कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा उपनिदेशक सरिता दरार ने सभी को धन्यवाद दिया।उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति सजगता और सक्रिय प्रयासों पर" विशेष बल" दिया।उन्होंने कहा कि, सामाजिक सेवा वस्तुत: मानवता की सेवा है और महिलाओं की सेवा मानव- मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण माध्यम है समाज में महिलाओं की स्थिति के उन्नयन उनके सम्मान ,सुरक्षा तथा सशक्तिकरण के लिए हम सभी को समन्वित ,सार्थक एवं सतत प्रयास करने चाहिए। महिलाओं के सर्वाधिक विकास के लिए बिना समतामूलक एवं सशक्त समाज की परिकल्पना पूर्ण नहीं हो सकती। 


कार्यक्रम की संयोजिका डॉ . राजवंती जी ने सभी को हृदय तल से धन्यवाद दिया एवं महिलाओं की दिशा एवं दशा के उन्नयन के लिए सबको आगे आने के लिए आवाहन किया। कार्यक्रम को बड़ी ही सजीदगी, आकर्षण एवं गुरुत्व तरीके से संचालन डॉ. संतोष सेन ने किया।


कार्यक्रम में प्रोफेसर रमेश मिश्रा, प्रांत संरक्षक प्रमुख, प्रोफेसर अखिलेश दुबे जी, प्रांत उपाध्यक्ष, डा.सुधाकर कुमार मिश्रा, डॉ अश्वनी मिश्रा, डॉ अजय कुमार सिंह, डॉ. अस्मित शर्मा एवं अन्य विशिष्ट बौद्धिक व्यक्तियों की गरिमामई उपस्थिति रही। कार्यक्रमोंपरांत स्वादिष्ट जलपान की व्यवस्था थी।

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