रवि गौतम
नित्य संदेश, परीक्षितगढ़। जहां पुलिस गलत काम करने वालों को जेल भेजती है, वहीं कई बार लोगों को समझाकर उनका जीवन संवारने का काम भी करती है। ऐसा ही एक मामला थाना परीक्षितगढ़ क्षेत्र के ग्राम दयालपुर में सामने आया है।
थाना प्रभारी केदार सिंह ने ग्राम दयालपुर निवासी जयकुमार पुत्र लीलापत को
मेरठ के सोहराब गेट रोडवेज अड्डे पर उस समय रोक लिया, जब वह आत्मदाह के लिए लखनऊ
जाने के लिए रवाना हो रहा था। पूछताछ में जयकुमार ने बताया कि उसके पिता लीलापत
सरकारी शिक्षक थे, जिनकी मृत्यु 2021 में हो गई थी। पिता की मृत्यु के बाद दोनों
भाइयों - बड़े भाई जयकुमार और छोटे भाई लक्ष्मण सिंह के बीच समझौता हुआ था कि
सरकारी नौकरी और मृतक फंड का पैसा छोटा भाई लक्ष्मण सिंह लेगा। जयकुमार का आरोप है
कि उसने कई बार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सभी कागजात जमा किए, लेकिन
6 माह बीत जाने के बाद भी नौकरी नहीं लग पाई। जबकि छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने अपनी
नौकरी करीब एक महीने में लगवा ली। इसको लेकर वह कई बार अधिकारियों से मिला और हाईकोर्ट
तक भी गया।
परेशान होकर वह मुख्यमंत्री के यहां आत्मदाह करने के लिए प्रार्थना पत्र देकर
लखनऊ के लिए रवाना हो रहा था। इसी दौरान थाना पुलिस ने उसे सोहराब गेट पर रोककर
थाने लाया और कानून का पालन करते हुए अपनी बात रखने के लिए समझाया। पुलिस की
समझाइश के बाद जयकुमार ने कहा कि बात उसकी समझ में आ गई है और वह अपने घर वापस जा
रहा है।

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