प्रत्येक सेट में बरगद, पीपल और पिलखन - गांव-गांव और वार्ड-वार्ड में लगेंगे पौधे
भारतीय परंपरा में हरिशंकरी का अर्थ है - बरगद, पीपल और पिलखन का एक साथ रोपण। इन वृक्षों को प्रकृति, जीवन और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। अभियान के माध्यम से इन वृक्षों के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
दिशाओं के अनुसार रोपण की विशेष योजना
संयोजक डा. सुमित उपाध्याय ने बताया कि अभियान में पौधों के रोपण के लिए विशेष दिशा-व्यवस्था रखी गई है। निर्धारित योजना के अनुसार बरगद का पौधा उत्तर दिशा में, पीपल का पौधा पूर्व दिशा में तथा पिलखन का पौधा पश्चिम दिशा में लगाया जाएगा। इस प्रकार एक ही स्थान पर तीनों वृक्षों का समूह तैयार होगा, जो भविष्य में एक हरित और प्राकृतिक परिसर के रूप में विकसित होगा।
हरिशंकरी के पर्यावरणीय लाभ
हरिशंकरी रोपण का सबसे बड़ा लाभ वृक्षों की विविधता और हरित आवरण में वृद्धि है। बरगद, पीपल और पिलखन लंबे समय तक जीवित रहने वाले वृक्ष हैं। उचित स्थान, पर्याप्त पानी और नियमित देखभाल मिलने पर ये आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी हरित संपदा बन सकते हैं। इनसे हरित आवरण में वृद्धि, स्थानीय तापमान में राहत, वायु गुणवत्ता में सुधार, जैव विविधता का संरक्षण, मृदा संरक्षण और भविष्य के लिए प्राकृतिक सौंदर्य जैसे लाभ मिलेंगे।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अभियान को गति
यह अभियान लोक भारती के सौजन्य से जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह जी की अध्यक्षता में आगे बढ़ाया जा रहा है। नोडल अधिकारी वंदना फोगाट DFO के नेतृत्व में पौधों की उपलब्धता, वितरण और रोपण संबंधी व्यवस्थाओं को समन्वित किया जा रहा है। अभियान के अवसर पर जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह द्वारा बैनर का लोकार्पण किया गया। बैनर के माध्यम से हरिशंकरी रोपण अभियान का संदेश जन-जन तक पहुंचाने और अधिक से अधिक लोगों को इस पर्यावरणीय पहल से जोड़ने का प्रयास किया गया। जिला प्रशासन ने समस्त मेरठवासियों से अपील की है कि वे अपने-अपने ग्राम पंचायत और वार्ड में इस अभियान को पूरे उत्साह से सफल बनाएं, पौधों को नियमित पानी दें और उनकी सुरक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी निभाएं।
एक हरिशंकरी - प्रकृति के नाम, हर गांव-हर वार्ड, हरित मेरठ का संकल्प।

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