नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर शुभम करोति फाउंडेशन द्वारा आयोजित
श्रीरामचरितमानस ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारंभ आभा मानव मंदिर वरिष्ठ नागरिक सेवा
सदन में भव्य रूप से हुआ।
ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ वेदांत आश्रम बिजौली से आए महामंडलेश्वर निर्वाणी
अखाड़ा स्वामी अनंतानंद सरस्वती महाराज द्वारा किया गया। कार्यक्रम में दीप
प्रज्ज्वलन एवं व्यास पूजन आभा मानव मंदिर के संस्थापक सुरेश चंद्र गोविल एवं आभा
गोविल ने किया। इस अवसर पर महाराज ने बालकांड की तात्विक व्याख्या करते हुए कहा कि
गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी दिव्य अनुभूतियों को लेखनी के
माध्यम से श्रीरामचरितमानस के रूप में प्रस्तुत किया। जिस प्रकार निराकार परमात्मा
साकार रूप में अवतार लेते हैं, उसी प्रकार वेद-उपनिषद भी रामायण आदि शास्त्रों के
रूप में अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस के चार घाट - ज्ञान
घाट, भक्ति घाट, कर्म घाट एवं दीन घाट हैं, तथा संत सोपान के रूप में सात कांड
हैं। इसके चार वक्ता-श्रोता हैं - भगवान शंकर पार्वती जी को, कागभुशुण्डि जी गरुड़
जी को, याज्ञवल्क्य जी भारद्वाज जी को एवं तुलसीदास जी दीनभाव से युक्त श्रोताओं
को कथा सुना रहे हैं।
महाराज जी ने कहा कि कर्म और भक्ति की साधना से अंतःकरण की पवित्रता और
एकाग्रता पुष्ट होती है, जिससे ज्ञान का उदय स्वतः हो जाता है। त्रेता में
वाल्मीकि रामायण, द्वापर में अध्यात्म रामायण और कलियुग में तुलसीदास जी द्वारा
रामचरितमानस के माध्यम से भगवान राम के नाम, गुण, लीला व धाम का वर्णन किया गया
है। उन्होंने कहा कि रामकथा अंतःकरण और बाह्य करण की शुद्धि का श्रेष्ठ साधन है।
यह पात्र को तत्वबोध कराती है और अपात्र को पात्र बनाती है। राम को वही जान पाता
है, जिसे वे जनाना चाहते हैं। कार्यक्रम में पूरनचंद शर्मा, खूबचंद सिंह सहित बड़ी
संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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