Sunday, August 9, 2026

मेरी अंतिम इच्छा — रविंद्र तंवर 'सूर्योदय'

नित्य संदेश 

मेरी अंतिम इच्छा


जहां भी अंतिम श्वास हो,

वहां शिव का वास हो।


मणिकर्णिका सा घाट हो,

बहती गंगा पास हो।।


भगवती का हाथ हो,

चिता की जलती आंच हो।


खत्म मोह का बंधन पाश हो,

मोक्ष पाने की आस हो।।


उठता हुआ दिखे धुंआ,

शरीर फिर ये खाक हो।


शुरू हो आखिरी सफ़र ये,

न कोई फिर साथ हो।।


जब भी अंतिम श्वास हो,

बस शिव का वहां वास हो।


मणिकर्णिका का घाट हो,

हां वो काशी विश्वनाथ हो ।।



—रविंद्र तंवर 'सूर्योदय'

    बड़वाह (म. प्र.)

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