
नित्य संदेश, इंदौर। हिंदी साहित्य के आकाश में सतीश राठी जी की सृजनधर्मिता एक दीप्त नक्षत्र की भाँति आलोकित रही। आप देश में लघुकथा और क्षितिज साहित्य संस्था के नींव के पत्थर थे। आपकी संवेदनशील, सजग और सशक्त लेखनी ने न केवल एक विशिष्ट पहचान अर्जित की, अपितु समकालीन साहित्य को गहन अर्थवत्ता भी प्रदान की।
आपकी रचनाएँ समय की धड़कनों को सुनती थीं, समाज की विसंगतियों को पहचानती थीं और मानवीय मूल्यों की ऊष्मा को अत्यंत मार्मिकता के साथ अभिव्यक्त करती थीं। विशेषतः लघुकथा विधा को आपने जिस साधना, सूक्ष्म दृष्टि और शिल्प-संपन्नता के साथ साधा, वह हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। आपकी लघुकथाएँ केवल कथ्य नहीं, बल्कि समय-साक्षी दस्तावेज़ बनकर पाठकों के अंतर्मन को स्पर्श करती हैं।
“शब्द साक्षी हैं”, “जिस्मों का तिलिस्म” जैसे लघुकथा-संग्रह, “पिघलती आँखों का सच” काव्य-संग्रह तथा “कोहरे में गाँव” ग़ज़ल-संग्रह आपकी रचनात्मक व्यापकता और भाव-गहनता के सशक्त प्रमाण हैं। अनेक साझा संकलनों में सहभागिता, लघुकथा-संग्रहों का संपादन तथा विविध संकलनों की भूमिकाएँ लिखकर आपने साहित्य-साधना को नई ऊर्जा प्रदान की। आपकी रचनाएँ विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित होकर नई पीढ़ी को संवेदनशील दृष्टि दे रही हैं, और विभिन्न भाषाओं में अनूदित होकर व्यापक पाठक-समाज तक पहुँच रही हैं।
क्षितिज साहित्यिक संस्था के माध्यम से आपका मार्गदर्शन अनेक नवांकुर रचनाकारों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहा। आपने युवा लेखकों को केवल प्रोत्साहन ही नहीं दिया, बल्कि उनकी सृजनात्मक चेतना को दिशा और संस्कार भी प्रदान किए। इंदौर से लघुकथा के क्षेत्र में उभरती सशक्त उपस्थिति आपकी साहित्य-सेवा का उज्ज्वल परिणाम है।
लघुकथा, कविता, ग़ज़ल, व्यंग्य और आलेख - साहित्य की विविध विधाओं में आपकी सक्रियता आपके बहुआयामी व्यक्तित्व की परिचायक थी। आपको प्राप्त सम्मान आपके साहित्यिक अवदान की स्वाभाविक और सार्थक स्वीकृति थे।
आपकी रचनाएं और लेखनी युगों युगों तक निरंतर साहित्य-जगत को दिशा, दृष्टि और प्रेरणा देती रहेंगी।
आज आप हमको रास्ते में छोड़कर अनंत में विलीन हो गए। विनम्र श्रद्धांजलि!
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