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Thursday, August 6, 2026

11 से 25 अगस्त तक चलेगा "मिशन सेफ फ्यूचर 2.0" अभियान


 • स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने उठाया सख्त कदम


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। जनपद में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग सख्त हो गया है। उप्र परिवहन आयुक्त के निर्देश पर मेरठ में 11 से 25 अगस्त तक 15 दिवसीय विशेष अभियान "मिशन सेफ फ्यूचर 2.0" चलाया जाएगा।


सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) मेरठ विकास कुमार यादव ने बताया कि विद्यालयी बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार और परिवहन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विगत वर्षों में हुई दुर्घटनाओं के विश्लेषण से सामने आया है कि अधिकांश हादसे चालकों की लापरवाही, स्कूल प्रबंधन की निगरानी में कमी और जर्जर-अनफिट वाहनों के संचालन के कारण हुए हैं। इसी को देखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है।


क्या-क्या होगी जांच?

अभियान के दौरान जिले के समस्त CBSE, ICSE, UP Board, बेसिक शिक्षा परिषद, सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों की स्कूल बसों, वैन एवं अन्य वाहनों का गहन निरीक्षण किया जाएगा। प्रत्येक वाहन के वैध पंजीयन, फिटनेस प्रमाण-पत्र, परमिट, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र, कर अदायगी, चालक के वैध ड्राइविंग लाइसेंस, प्राथमिक उपचार पेटी, अग्निशमन यंत्र, स्पीड गवर्नर, जीपीएस, व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम, आपातकालीन निकास, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप सहित केंद्रीय मोटरयान नियमावली के सभी सुरक्षा मानकों की जांच होगी।


रेड लिस्ट होगी तैयार

बताया कि जो विद्यालय बिना पंजीकृत निजी या अनुबंधित वाहनों से बच्चों को ढो रहे हैं, उनकी अलग सूची बनेगी, जहां गंभीर अनियमितता या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिलेगा, उन स्कूलों की "रेड लिस्ट" बनाकर जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को कार्रवाई के लिए भेजी जाएगा। साथ ही स्कूल प्रबंधन को सभी चालकों का चरित्र सत्यापन, स्वास्थ्य परीक्षण और नेत्र परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। छोटे बच्चों के परिवहन के लिए प्रत्येक वाहन में एक प्रशिक्षित महिला या पुरुष सहायक की उपस्थिति भी अनिवार्य की गई है।


नोटिस वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

जिन वाहनों को पहले नोटिस दिए जाने के बाद भी फिटनेस नहीं कराई गई या कमियां दूर नहीं की गईं, उनके विरुद्ध मोटरयान अधिनियम 1988 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने सभी विद्यालय प्रबंधकों, वाहन स्वामियों, चालकों और अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केवल पूर्णतः फिट और मानक के अनुसार वाहनों का ही संचालन सुनिश्चित करें।

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