Wednesday, July 29, 2026

भारतीय ज्ञानपरम्परा के प्रकाशस्तम्भ महर्षि वेदव्यास



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ।  चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर के संस्कृत विभाग में श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ भारतवर्ष के परम पर्व गुरु पूर्णिमा को मनाया गया। जिसमें व्यास-वन्दना के साथ विभाग के सह-विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशान्त शर्मा ने गुरु पूर्णिमा की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास के जन्मदिन के उपलक्ष्य में यह पर्व समग्र भारतवर्ष तथा विश्व के अनेक देशों में मनाया जाता है। इसे व्यासपूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। 

महर्षि कृष्ण द्वैपायन व्यास ने पञ्चम वेद कहे जाने वाले ऐतिहासिक महाकाव्य महाभारत की रचना की, जिसके भीष्मपर्व से उद्धृत श्रीमद्भगवद्गीता एक स्वतन्त्र ग्रन्थ के रूप में विश्वभर में समादृत है। भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल वेदों का वर्गीकरण करने के कारण महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास कहलाए। वेदों का व्यास करने वाले तथा महाभारत जैसे ऐतिहासिक कालजयी ग्रन्थ की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास भारतीय ज्ञानपरम्परा के प्रकाशस्तम्भ हैं। शास्त्र हम सभी के गुरु हैं। शास्त्रों का अध्ययन एवं तदनुसार जीवन में आचरण भी गुरु-वन्दना है। डॉ. नरेन्द्र कुमार ने भारतीय ज्ञान-परम्परा में गुरु के सर्वोच्च स्थान पर प्रकाश डालते हुए गुरु-शिष्य परम्परा के आदर्शों को जीवन में आत्मसात् करने का आह्वान किया। श्री तुषार गोयल ने कहा कि भारतीय संस्कृति की समृद्ध गुरु-शिष्य परम्परा आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। 

डॉ. आभा कंसल ने कहा कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों का सम्मान कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम के अन्त में सभी छात्र-छात्राओं ने गुरुजनों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की मंगलकामना की। इस कार्यक्रम में आरती, कृतिका, तनूजा, सोनम, उषा, रिया, शिवानी, विष्णु, उज्ज्वल रावत आदि विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में साहिल तरीका, सुमित शर्मा एवं बबलू का सहयोग रहा।

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