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Saturday, July 4, 2026

इंदौर का 'घोस्ट हॉस्पिटल': कागज़ों पर तबादले, फाइलों में डॉक्टर-लेकिन ज़मीन पर सिर्फ सन्नाटा...!

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। क्या आपने कभी किसी ऐसे अस्पताल के बारे में सुना है जहां आलीशान पद हैं, डॉक्टरों और नर्सों की नियुक्तियां होती हैं, बकायदा ट्रांसफर ऑर्डर भी जारी किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में उस अस्पताल की एक भी ईंट अस्तित्व में नहीं है?

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक ऐसा ही हैरतअंगेज और प्रशासनिक लापरवाही से भरा मामला सामने आया है। यह कहानी है इंदौर के खजराना सिविल हॉस्पिटल की, जो पिछले छह सालों से सिर्फ और सिर्फ सरकारी फाइलों और पोर्टल्स पर 'ज़िंदा' है, जबकि ज़मीन पर इसका कोई नामोनिशान तक नहीं है।


• जून 2026 का वो 'रहस्यमयी' ट्रांसफर ऑर्डर... 

इस भूतिया अस्पताल का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह आज भी सरकारी कागज़ात में पूरी तरह एक्टिव है। अभी हाल ही में, 15 जून, 2026 को स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक आधिकारिक पोस्टिंग ऑर्डर जारी किया गया। इस ऑर्डर के तहत एक लैब टेक्नीशियन का तबादला सीधे 'खजराना सिविल हॉस्पिटल' के लिए कर दिया गया। मज़ेदार बात यह है कि जिस अस्पताल में इस कर्मचारी को भेजा गया, वहां आज तक न तो कोई इमारत बनी है और न ही कभी कोई मरीज भर्ती हुआ है। इस अजीबोगरीब ट्रांसफर ने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।


• 3 लाख जनता की उम्मीदें और 87 अदृश्य' सरकारी पद.. 

इस पूरी कहानी की शुरुआत 23 जून, 2020 को हुई थी, जब मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के बेहद घनी आबादी वाले खजराना इलाके के लिए 100 बिस्तरों वाले एक सिविल अस्पताल को मंजूरी दी थी। इस प्रोजेक्ट का मकसद खजराना, मूसाखेड़ी, तेजाजी नगर और बिचोली हप्सी जैसे क्षेत्रों के करीब तीन लाख से अधिक लोगों को सीधे स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना था। साथ ही, इससे शहर के बड़े अस्पतालों जैसे MY, MTH और जिला अस्पताल पर मरीजों का बोझ कम होना था। मंजूरी के साथ ही सरकार ने इस अस्पताल के लिए 87 सरकारी पदों को भी हरी झंडी दे दी। इन पदों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन शामिल थे। लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी यह अस्पताल फाइलों से बाहर नहीं निकल सका क्योंकि स्वास्थ्य विभाग इसके लिए जमीन ही अलॉट नहीं करवा पाया।

• डॉक्टर से नर्स तक 87 लोगों की पोस्टिंग और ट्रांसफर, इंदौर में बिना बिल्डिंग कागजों पर चल रहा 100 बिस्तर का अस्पताल।


• इंदौर के खजराना में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लोगों का संघर्ष जारी है। 6 साल बाद भी 100 बेड का अस्पताल अधूरा पड़ा है।


• खजराना सिविल अस्पताल सिर्फ कागजों पर चल रहा है, जहां 6 साल बाद भी जमीन या इमारत नहीं है, फिर भी 87 स्टाफ की नियुक्तियां और तबादले हो रहे हैं।

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