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Monday, June 22, 2026

संत हिरदाराम नगर में जन्मी बेटी ने रचा इतिहास

नित्य संदेश 

संत हिरदाराम नगर में जन्मी बेटी लेखिका वीना आडवानी तन्वी ने इतिहास रच दिया। सिन्धी के जाने माने साहित्यकार श्री आसूदोमल लछवानी की छोटी बेटी, जो की अपने पिता की ही तरह एक लेखिका हैं। जो‌ हिन्दी साहित्य क्षेत्र में अपनी लेखन विद्या से अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं, जिन्हें हिन्दी साहित्य क्षेत्र में बहुत से सम्मान प्राप्त हुए हैं, ऐसी प्रतिभावान बेटी वर्तमान में नागपुर निवासी ने ही, लॉकडाऊन के अंतराल में देवनागरी सिन्धी भाषा को भी समय का सदुपयोग करते हुए सीखा, साथ ही जर्नलिस्ट का भी बेसिक कोर्स आनलाईन किया ।

 

एक वर्ष उन्होंने पत्रकार के क्षेत्र में भी काम किया परंतु उन्हें आंतरिक खुशी ना प्राप्त हुई। तभी उनके मन में कुछ अलग करने का जज्बा आया, इस जज्बे और जुनून की चाह में उनके मन में एक सवाल आया कि क्यों ना स्वयं की एक पुस्तक लिखूं परंतु, उन्हीं दिनों में उनके ही शहर के एक वरिष्ठ साहित्यकार की पत्नी का निधन हो गया। जब वीना जी सांत्वना देने गई उनके घर तो देखा उन वरिष्ठ साहित्यकार की बहुत सी किताबें धूमिल हो रही थी। उन्हें कोई पढ़ने तक में रूचि नहीं ले रहा था। वरिष्ठ साहित्यकार ने जब पुस्तक से संबंधित आप बीती सुनाई तो वीना जी के मन में कुछ विचार उठा और वरिष्ठ साहित्यकार के घर से वापस आने पर पुनः विचार कर अपनी स्वयं की पुस्तक प्रकाशित करने का विचार बदल दिया। 


फिर उन्होंने विचार किया कुछ अलग हट के करने का और उन्होंने तब सम्मानित ग्रंथ का हिन्दी भाषा से सिन्धी देवनागरी भाषा में अनुवाद करने का संकल्प लिया, सर्वप्रथम उन्होंने श्री साईं बाबा व उनकी लीलाओं पर आधारित श्री साईं सच्चरित्र ग्रंथ का अनुवाद किया और बहुत ही सादगी से नागपुर स्थित सांई मंदिर में ही विधि विधान से पूजा-अर्चना कर उन्होंने मंदिर में भक्तों द्वारा पढ़ने के लिए सांई सच्चरित्र ग्रंथ की प्रति भेंट की। 


आगे और भी मन चाहा कुछ नया करने का तब उन्होंने श्री ज्ञानेश्वरी संत द्वारा रचित ज्ञानेश्वरी ग्रंथ का अनुवाद भी देवनागरी सिन्धी भाषा में किया। बस यही लालसा वीना जी की बढ़ती गई उन्होंने इसी लालसा को शांत करने के लिए फिर कुछ नया करने को ठाना और...


हमारे देश के प्रथम राष्ट्रीय वेद ऋग्वेद का अनुवाद किया सिन्धी भाषा में किया, वीना जी पूरे विश्व में पहली सिन्धी लेखिका हैं जिन्होंने ऋग्वेद का अनुवाद सिन्धी भाषा में किया है। अब वीना जी ने हमारे दूसरे वेद सामवेद का अनुवाद भी कर लिया है, सामवेद को भी सिन्धी भाषा में अनुवादित करने वाली वो विश्व की पहली सिन्धी लेखिका है। अपने जन्मदिवस 22 जून 2026 को ही उन्होंने बहुत ही सादगी से मंदिर में जाकर पूजा अर्चना कर भगवान के सामने सामवेद का विमोचन किया। 


वीना जी ने बताया कि जब वो प्रथम ग्रंथ श्री साईं सच्चरित्र का अनुवाद कर रही थी तब उनकी लिखी अनुवाद में पंक्तियां या मात्रा सही है या नहीं इसके लिए उन्होंने अपने प्रथम गुरु जिन्होंने देवनागरी सिन्धी सिखाई उनसे बात की। परंतु, कुछ ही दिन गुजरने पर गुरु खिन्न हो गये और बोले मैं कितना पढूंगा, मेरे पास ओर भी काम है। उसके बाद वीना ने अपने ही पिता जो की सिन्धी के जाने-माने साहित्यकार हैं उनसे मदद ली और उनके पिता श्री आसूदोमल लछवानी ने प्रथम ग्रंथ व दूसरे ग्रंथ का पाठ करते-करते खामियों को दूर किया। प्रथम राष्ट्रीय वेद में भी थोड़ी बहुत मदद की । 


वीना जी बताती हैं कि उन्होंने अनुवाद कार्य में सोशल मीडिया पर दिये अनुवाद करने वाले एप को भी अपना गुरु बनाया। समय-समय पर अनुवाद करते वक्त यदि किसी शब्द का अर्थ बहुत ही कठीन होता तो वह उस शब्द का हिन्दी में भी अर्थ लिख देती ताकि किसी को भी पढ़ने में जो दिक्कत उन्हें हुई वह न हो और स्पष्ट अर्थ आसानी से समझ आए। 


इस तरह उनके इस धार्मिक क्षेत्र में किये जा रहे प्रयास में उनके दो गुरु रहे। एक उनके पिता जी और दूसरा ट्रांसलेट एप जिन्होंने बिना कोई फटकार के, सम्मान के साथ हर पल वीना जी का साथ दिया। कहते हैं गुरु बिन सब सून और वीना जी ने तो अपने ही फोन में भी ट्रांसलेट एप में अपना गुरु ढूंढ लिया, जब जज़्बा और जुनून हो, कुछ कर दिखाने का तो रस्ता कहीं ना कहीं से परम पिता परमेश्वर निकाल ही देते हैं और यही उनके साथ हुआ। 


वीना जी से जब बात की तो उन्होंने बताया कि जब उन्होंने श्री साईं सच्चरित्र का अनुवाद किया तो उसमें दान का बहुत ही अधिक महत्व दिया था और उन्होंने अपने परिचितों व जानने वालों से दान लेकर ही श्री साईं सच्चरित्र ग्रंथ का प्रकाशन किया और इच्छुक पाठकों को दान में ही ग्रंथ दिया। ज्ञानेश्वरी ग्रंथ व ऋग्वेद के लिए दान नहीं लिया। परंतु सामवेद में भी दान का महत्व बताया गया है इसलिए उन्होंने परिचित व जानने वालों से दान की इच्छा जताई और उन्हीं पैसों से सामवेद का प्रकाशन किया। आज वो विश्व की प्रथम लेखिका हैं जिन्होंने ऋग्वेद व सामवेद का सिन्धी भाषा में अनुवाद करने का सौभाग्य प्रभु कृपा से प्राप्त किया। वीना जी कहती हैं करने और करवाने वाला वो भगवान है हम तो सिर्फ निमित्त मात्र हैं। ग्रंथों के अनुवाद करते समय अंतराल में उनके साथ बहुत सी सुखद व कुछ दुखद घटना भी हुई जिसे उन्होंने बताया पर वो बढ़ती गई अपनी आध्यात्मिक राह पर क्यों कि उनका मानना है ईश्वर साक्षात उनके साथ है तो घबराना क्यों और कैसा? 


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