Wednesday, June 24, 2026

सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग में छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आगाज़

 

ए.आई.सी.टी.ई. आइडिया लैब के तत्वावधान में शिक्षकों को मिलेगा अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण, प्राणिक हीलिंग सत्र ने किया सकारात्मक ऊर्जा का संचार

नित्य संदेश ब्यूरो

 

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग में एआईसीटीई आइडिया लैब के तत्वावधान में छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम  का भव्य शुभारंभ किया गया। आधुनिक तकनीकों, नवाचार, अनुसंधान एवं उद्योग 4.0 से जुड़े अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकी कौशल से शिक्षकों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को एआईसीटीई आइडिया लैब  की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।


विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने कार्यक्रम के शुभारंभ पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा और तकनीक का समन्वय ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों को नई तकनीकों से जोड़ने, नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करने और विद्यार्थियों को तकनीक आधारित एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अर्जित ज्ञान को विद्यार्थियों तक पहुंचाकर वे देश के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।


सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग के डीन प्रो. (डॉ.) मनोज कपिल ने सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश में निरंतर सीखना और स्वयं को अद्यतन रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नवीनतम तकनीकों से परिचित कराएगा, जिससे वे विद्यार्थियों को व्यावहारिक, कौशल आधारित और रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने में सक्षम होंगे। साथ ही यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देगा।


कार्यक्रम के प्रथम दिन के मुख्य वक्ता विजय कुमार रहे, जो भारतीय सेना के पूर्व धार्मिक शिक्षक हैं और व्यक्तित्व विकास, मानसिक स्वास्थ्य तथा सकारात्मक जीवन शैली के क्षेत्र में विशेष अनुभव रखते हैं। प्रथम सत्र की शुरुआत उनके सानिध्य में प्राणिक हीलिंग’ विषय पर हुई। उन्होंने प्रतिभागियों को ऊर्जा आधारित हीलिंग प्रणाली, मानसिक संतुलन, तनाव प्रबंधन और सकारात्मक ऊर्जा के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि प्राणिक हीलिंग की स्थापना ग्रैंड मास्टर चाओ कॉक स्वी द्वारा की गई थी और आज यह पद्धति विश्व के 120 से अधिक देशों में अपनाई जा रही है। इस सत्र के माध्यम से संकाय सदस्यों को मानसिक स्पष्टता, सकारात्मक सोच, आत्मिक ऊर्जा के विकास तथा व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में संतुलन बनाए रखने के प्रभावी उपाय बताए गए। इसके पश्चात निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तकनीकी सत्रों का शुभारंभ किया गया। छह दिवसीय इस एफडीपी में प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक मशीनों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी प्रदान किए जाएंगे।


कार्यक्रम के अंतर्गत एडवांस मैन्युफैक्चरिंग एवं फैब्रिकेशन, पारंपरिक एवं ऑटोमेटेड टूल्स, फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजीज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स , रोबोटिक्स, नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यक्रम शिक्षकों को नई तकनीकों से लैस करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत, अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।


इस छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के मुख्य समन्वयक इंजीनियर अजय चौधरी एवं डॉ. हिमांशु  हैं, जिनके कुशल मार्गदर्शन और समर्पित प्रयासों से कार्यक्रम का सफल आयोजन किया जा रहा है। दोनों समन्वयकों ने प्रतिभागियों से प्रत्येक सत्र में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने और प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उत्साह, नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता के संकल्प के साथ प्रारंभ हुआ यह कार्यक्रम आने वाले दिनों में शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाने और उच्च शिक्षा में नवाचार आधारित शिक्षण संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

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