Saturday, June 13, 2026

पत्रकारिता का ‘प’ नहीं पता होता, लेकिन बन जाएंगे रिपोर्टर?

तरुण आहुजा 
नित्य संदेश, मेरठ। पत्रकारिता को समाज का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन जब कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में विवादों में घिरते हैं, तो कई सवाल खड़े होने लगते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर चर्चा है, जिसमें एक महिला और एक पुरुष खुद को पत्रकार बताकर एक निर्माण स्थल पर पहुंचे। आरोप है कि वहां निर्माण मालिक के परिवार, खासकर बेटी से बातचीत के दौरान विवाद हुआ और मामला बढ़ गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कुछ लोग पत्रकारिता के नाम पर दबाव बनाने या उगाही जैसे आरोपों में चर्चा में रहते हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही संभव है। ये वीडियो नया है या पुराना अभी पुष्टि होना बाकी है साथ ही यह भी चर्चा में है कि इससे पहले भी एक व्यक्ति, जो खुद को पत्रकार बताता था, नई सड़क स्थित स्पा सेंटर की आड़ में चल रहे कथित अनैतिक गतिविधियों के मामले में जेल जा चुका है। 

हालांकि, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को अंतिम सत्य मानने से पहले न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पत्रकारिता का मतलब डर या दबाव बनाना है? असली पत्रकारिता समाज की समस्याओं को उठाने, सच दिखाने और जनता की आवाज बनने का माध्यम है, न कि विवादों का कारण।

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