अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के बजाय एसी में आराम फरमा रहे अधिकारी?
तरुण आहुजा
नित्य संदेश, मेरठ: शास्त्री नगर में पिछले करीब दो महीनों से महिलाएं अपने घर बचाने की मांग को लेकर धरने पर बैठी हैं। अब जैसे-जैसे 14 जुलाई नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे लोगों की धड़कनें भी तेज होती जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के संभावित अंतिम फैसले को लेकर हर परिवार के मन में एक ही सवाल है — आखिर फैसला क्या होगा और क्या उनके घर सुरक्षित बच पाएंगे?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि “सेटबैक” का मामला आखिर आया कहां से और यदि आया तो सिर्फ कुछ लोगों पर ही क्यों लागू किया गया? बताया जा रहा है कि 661/6 कॉम्प्लेक्स का मामला वर्ष 2014 से न्यायालय में विचाराधीन था, जो तारीख दर तारीख चलता रहा और अंततः 25 अक्टूबर को ध्वस्तीकरण के आदेश जारी हुए। इसके बाद 31 भूखंडों पर भी आदेश हुए। लेकिन इसी बीच सेटबैक का मुद्दा अचानक कैसे सामने आया और किस आधार पर आया, इसका जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
10 हजार मकानों में सिर्फ 869 पर ही सेट बैक क्यों?
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यदि सेक्टर 1 से 13 तक लगभग 10 हजार मकान हैं और करीब 50 प्रतिशत स्थानों पर दुकानें संचालित हो रही हैं, जहां अधिकांश जगह सेटबैक नहीं छोड़ा गया, तो फिर कार्रवाई की जद में सिर्फ 869 भवनों को ही क्यों लिया गया? क्या यह चयन किसी निष्पक्ष सर्वे का परिणाम था या फिर इसमें भेदभाव हुआ?
सर्वे टीम पर भी उठ रहे सवाल:
लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि आखिर वह सर्वे टीम कौन थी जिसने तय किया कि कौन-सा निर्माण वैध है और कौन अवैध? स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाबू, जेई और एई स्तर पर किए गए सर्वे में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कुछ लोगों को कथित “सेटिंग” के चलते छोड़ दिया गया।
बनते अवैध निर्माणों पर कार्रवाई क्यों नहीं?:
एक ओर पुराने निर्माणों पर कार्रवाई की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर शास्त्री नगर के कई क्षेत्रों में नए निर्माण लगातार जारी हैं। आरोप है कि संबंधित अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति कर मामलों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार जे-36, एच-376 और सेक्टर 11 में निर्माण कार्य इसके उदाहरण बताए जा रहे हैं।
चमन और मुमताज का नाम चर्चाओं में :
हालांकि बाबू मुमताज का ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन क्षेत्र में आज भी चमन और मुमताज के नाम चर्चाओं में बने हुए हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर अवैध निर्माणों पर समान कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। अब देखने वाली बात यह होगी कि 14 जुलाई से पहले क्या निर्णय निकलता है।
क्या महिलाओ का संघर्ष रंग लाएगा, या फिर आवास विकास की कार्रवाई आगे बढ़ेगी — इसका जवाब आने वाला समय देगा। ये कहना है ! सेक्टर -2/3/4 की महिलाओं का: हम पिछले 2 माह से धरने पर बैठी है! व्यवसाय बंद हो चुके है! अब ईश्वर पर ही विश्वास है वही हमारे आशियाने बचाएंगे।
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