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Thursday, June 18, 2026

योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर, स्वस्थ जीवन का आधार है : स्वामी कर्मवीर महाराज

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ एवं क्रीड़ा भारती के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के खेल मैदान पर आयोजित सात दिवसीय योग शिविर के चौथे दिन योग गुरु स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने योग, प्राणायाम, प्राकृतिक चिकित्सा तथा संतुलित जीवनशैली के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने वाली एक संपूर्ण जीवन पद्धति है। भारतीय संस्कृति की यह अमूल्य धरोहर आज पूरे विश्व में स्वास्थ्य और मानसिक शांति का माध्यम बन रही है।

शिविर में स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने महायोग क्रिया, कपोत उज्जायी, कर्ण रोगांतक प्राणायाम, पैरों एवं कूल्हों (हिप) के विशेष अभ्यास, पशु विश्रामासन, वज्रासन, उम्रताड़ासन, मंडूकासन, सर्पाटिका तथा कटिचक्रासन एवं ताड़ासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से शरीर में लचीलापन आता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा मानसिक तनाव दूर होता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य का वर्तमान और भविष्य उसके संस्कारों, विचारों और आचरण पर निर्भर करता है। जन्म, औषधि, मंत्र, भोजन और विचार जीवन को दिशा प्रदान करते हैं। यदि व्यक्ति सकारात्मक विचारों को अपनाता है तो उसका जीवन भी सकारात्मकता से परिपूर्ण हो जाता है। उन्होंने गायत्री मंत्र एवं ‘ॐ’ के नियमित जाप का महत्व बताते हुए कहा कि इनके उच्चारण से मन की शुद्धि होती है, एकाग्रता बढ़ती है तथा व्यक्ति सद्गति की ओर अग्रसर होता है।

स्वामी जी ने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य जीवन के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। यदि इन तीनों का संतुलन बना रहे तो व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ और ऊर्जावान रह सकता है। उन्होंने बताया कि प्राणायाम से शरीर में हल्कापन, मन में प्रसन्नता तथा विचारों में स्पष्टता आती है। योग और प्राणायाम का नियमित अभ्यास अनेक शारीरिक एवं मानसिक विकारों से बचाव में सहायक सिद्ध होता है।

उन्होंने आधुनिक जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज अधिकांश रोग असंतुलित खानपान, तनाव, शारीरिक श्रम की कमी तथा कृत्रिम जीवनशैली के कारण उत्पन्न हो रहे हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और तनाव जैसी समस्याएं इसी का परिणाम हैं। उन्होंने लोगों से प्राकृतिक एवं सात्विक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने प्राकृतिक चिकित्सा एवं आयुर्वेद की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में अनेक जड़ी-बूटियां विभिन्न रोगों के उपचार में सहायक सिद्ध होती हैं। ब्राह्मी, शतावरी, अश्वगंधा, गिलोय, मंजीष्ठा, पुनर्नवा, गोखरू, शंखपुष्पी तथा जटामांसी जैसी औषधियां शरीर को बल प्रदान करने के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ बनाती हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति शरीर की मूल प्रकृति को संतुलित कर रोगों को जड़ से समाप्त करने का प्रयास करती है।

उन्होंने श्रृंगी चिकित्सा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पद्धति के माध्यम से शरीर के दूषित रक्त एवं विजातीय तत्वों को बाहर निकालने में सहायता मिलती है। साथ ही उन्होंने त्रिफला के महत्व को बताते हुए कहा कि यह आंखों, गले, स्वर तंत्र (वोकल कॉर्ड), बालों तथा पाचन तंत्र के लिए अत्यंत लाभकारी है।

स्वामी जी ने युवाओं और महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सौंदर्य प्रसाधनों (कॉस्मेटिक्स) के अत्यधिक उपयोग से बचना चाहिए क्योंकि इनमें अनेक रासायनिक तत्व होते हैं जो त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। प्राकृतिक उपायों एवं योग के माध्यम से स्वस्थ एवं आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि योग केवल रोगों के उपचार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को अनुशासित, संतुलित और सकारात्मक बनाने का सशक्त साधन है। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय योग, प्राणायाम और ध्यान के लिए निकाले तो समाज को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ बनाया जा सकता है।

शिविर में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी, खेल प्रशिक्षु एवं योग साधक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने स्वामी कर्मवीर जी महाराज के मार्गदर्शन में योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय प्रोफेसर संगीता शुक्ला वित्त अधिकारी रमेश चंद्र परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्णा यादव प्रोफेसर वीरपाल सिंह  मीनाक्षी भराला महामंडलेश्वर नीलमानन्द प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा प्रोफेसर अनिल मलिक प्रोफेसर गुलाब सिंह रुहल, प्रोफेसर प्रदीप चौधरी डॉक्टर ओमपाल सिंह, डॉ अलका तिवारी प्रोफेसर प्रशांत कुमार डॉक्टर दुष्यंत चौहान डॉक्टर सचिन कुमार डॉक्टर वैशाली पाटील, डॉक्टर जितेंद्र गोयल, अकाउंट ऑफिसर योगेश उपाध्याय, इंजीनियर मनीष मिश्रा, डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार,जगत सिंह दौसा, राजन कुमार, अमरपाल, सत्यम सिंह आदि मौजूद रहे।

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