Monday, June 15, 2026

स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन के लिए योग अपनाएं: स्वामी कर्मवीर

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वस्थ एवं निरोग जीवन के उद्देश्य से आयोजित सात दिवसीय योग शिविर का शुभारंभ योग गुरु स्वामी कर्मवीर जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। शिविर में बड़ी संख्या में योग साधकों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर योग गुरु स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि “रोग अनेक हैं, लेकिन उनका समाधान एक योग में निहित है।”


स्वामी कर्मवीर महाराज ने कहा कि वर्तमान जीवनशैली के कारण अनेक प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। योग न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मन को भी शांत एवं संतुलित करता है। उन्होंने बताया कि प्राणायाम के नियमित अभ्यास से मन की चंचलता समाप्त होती है और व्यक्ति तनाव, चिंता तथा क्रोध जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से मुक्त होता है। उन्होंने कहा कि “क्रोधी व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता, क्योंकि उसका मन सदैव अशांत रहता है। योग और प्राणायाम मन को शांति प्रदान कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। योग गुरु ने सूर्यभेदी एवं चन्द्रभेदी प्राणायाम, कपोत-उज्जायी प्राणायाम, सिद्धासन, पद्मासन एवं सुखासन के लाभ बताते हुए कहा कि ये अभ्यास विशेष रूप से थायरॉयड, गले के रोग, टॉन्सिल तथा श्वसन तंत्र संबंधी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से नजला, जुकाम, खांसी, साइनस जैसी ईएनटी संबंधी समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार होता है।


उन्होंने आयुर्वेद और योग के समन्वय पर बल देते हुए बताया कि त्रिकुटा (काली मिर्च, सौंठ एवं पीपली) को शहद के साथ लेने से श्वसन तंत्र को लाभ मिलता है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि मोटापा, अतिरिक्त चर्बी तथा अनेक जीवनशैली जनित रोगों के नियंत्रण में भी योग अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ है। स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने कहा कि अधिकांश रोगों की जड़ पाचन तंत्र की गड़बड़ी है। कब्ज, बवासीर तथा पेट संबंधी अनेक समस्याएँ एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। उन्होंने पवनमुक्तासन, चक्की चालन, वज्रासन एवं वज्रनितम्ब चालन जैसे अभ्यासों को पेट, घुटनों, रक्त संचार तथा शिराओं से संबंधित समस्याओं के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि पशुविश्रामासन एवं सूक्ष्म व्यायाम पीठ, कमर तथा जोड़ों के दर्द में विशेष रूप से लाभ पहुंचाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक खड़े रहने से शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए दैनिक जीवन में सही बैठने, उठने एवं कार्य करने की आदतों को अपनाना आवश्यक है। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन पद्धति है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का मार्ग प्रशस्त करती है। स्वामी जी ने कहा कि संस्था का उद्देश्य गुरुकुलीय शिक्षा, आयुर्वेद, योग तथा गौ-संरक्षण जैसी भारतीय परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने युवाओं से नियमित योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।


इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डॉ. राजेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं अमूल्य धरोहर है, जिसे आज पूरा विश्व अपना रहा है। उन्होंने कहा कि योग केवल रोगों के उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ, अनुशासित एवं सकारात्मक जीवन का आधार है। ऐसे शिविर समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को नशामुक्त एवं तनावमुक्त जीवन की दिशा भी प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से योग को दैनिक जीवन में अपनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक देन है। योग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। विश्वविद्यालय सदैव ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहेगा, जो समाज को स्वस्थ एवं जागरूक बनाने में योगदान दें।

शिविर के अंत में प्रतिभागियों को हास्यासन, शांति पाठ एवं ध्यान का अभ्यास कराया गया। इस अवसर पर प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता, प्रो. बीरपाल सिंह, प्रो. आलोक कुमार, प्रो. कृष्णकांत शर्मा, प्रो. राकेश कुमार शर्मा, प्रो. गुलाब सिंह रूहल, डॉ. दुष्यंत चौहान, प्रो. प्रदीप चौधरी, प्रो. प्रशांत कुमार, डॉ. अलका तिवारी, डॉ. वैशाली पाटिल, डॉ. जितेंद्र गोयल, डॉ. ओमपाल सिंह, डॉ. संदीप त्यागी, जगत सिंह दौसा, राजन कुमार इंजीनियर मनीष मिश्रा, इंजीनियर मनोज कुमार, प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता, डीपी सिंह, आदि मौजूद रहे।

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