Saturday, June 20, 2026

मैंने पिता को देखा है...—रविन्द्र तंवर "सूर्योदय"

नित्य संदेश

मैंने पिता को देखा है...

मेरे पैदा होने पर, 

खुशी से झूमते देखा है।

नहीं देखा मैने ईश्वर, 

मैंने पिता को देखा है।।


मुझे खिलौने दिलाने खातिर, 

जिस्म पसीने से तर-बतर देखा है।

नहीं देखा मैंने ईश्वर,

मैने मजदूर पिता को देखा है।।


मुझे देकर खुशियों कि छाया,

दुखों की धूप में झुलसते देखा है।

नहीं देखा मैने ईश्वर,

मैंने वट वृक्ष समान पिता को देखा है।।


खिलाकर अपने हिस्से की रोटी,

एक लोटा पानी पीते देखा है।

नहीं देखा मैंने ईश्वर,

मैंने भूखे रहते पिता को देखा है।।


नई पोशाक मुझे पहनाकर,

उन्हें फटे कपडे सिलते देखा है।

नहीं देखा मैंने ईश्वर,

मैंने मजबूर पिता को देखा है।।


डांटते है मुझे शख्त लहजे में,

मैंने उनकी नम आंखों को देखा है।

नहीं देखा मैने ईश्वर,

मैंने रोते पिता को देखा है।।


मेरे सपनो के खातिर,

मेहनत दिन- रात करते देखा है।

नहीं देखा मैने ईश्वर,

मैंने महान पिता को देखा है।।


टुट न जाए नींद मेरी,

उन्हें गर्मी में सोते देखा है।

नहीं देखा मैंने ईश्वर,

मैंने जागते पिता को देखा है।।


रह न जाए भूखे बच्चे,

यह चिन्ता करते देखा है।

नहीं देखा मैने ईश्वर,

मैंने पालनहार पिता को देखा है।।


ख़्वाहिशे मेरी पूरी करते,

अपने आंगन मे कल्पवृक्ष देखा है।

नहीं देखा मैने ईश्वर,

मैंने बस पिता को देखा है।।


थामे रखते हर दम हाथ मेरा,

एक अजब फरिश्ता देखा है,

हां, नहीं देखा मैंने ईश्वर,

मैंने अपने पिता को देखा है।।



रविंद्र तंवर 'सूर्योदय'

बड़वाह (म. प्र.)

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