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Tuesday, June 16, 2026

महंगाई की तपिश में तप रहीं रसोइयां


नित्य संदेश। 
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई वृद्धि का असर अब बाजार के साथ साथ गृहणियों की रसोइयों में भी साफ दिखने लगा है। आटा दाल, चावल, मेवे और मसालों से लेकर सरसों के तेल के दामों में बढ़ोतरी से रसोई का बजट बिगड़ गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर पहले से ही देखा जा रहा था लेकिन केंद्र सरकार द्वारा एक महीने में तीन बार पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि ने स्थिति और बिगाड़ दी। 


ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने से बाहरी राज्यों से मंडियों तक माल की आवक कम हो गई है। आवक घटने और मांग बनी रहने के चलते कई किराना सामानों के दामों में वृद्धि दर्ज की गई है। अनाज मंडी के व्यापारियों के अनुसार पिछले लगभग एक महीने में अकेले चावलों की कीमतों में ही 20 रुपए प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। आटे के दाम भी लगभग तीन से 4 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। सरसों का तेल जहां 10 रूपये प्रति लीटर तक महंगा हुआ है वहीं अरहर की दाल 8 रुपए प्रति किलो तक महंगी हुई है। कई ब्रांडेड कंपनियों ने तो दाम बढ़ाने के बजाय पैकेट में सामान का वजन कम कर दिया है। इसके चलते मेरठ जिले के थोक बाजारों में अनिश्चिता का माहौल है। चने की दाल से लेकर उड़द की दाल, राजमा, पिसा धनिया, साबुत लाल मिर्च, पिसी हल्दी, जावित्री और काली इलायची के दाम आसमान छू रहे हैं। सफेद इलायची से लेकर सूखे मेवों की कीमतें रिकॉर्ड तोड़ रही हैं। 

किराना व्यापारी देवेंद्र गंगवार के अनुसार पिछले एक महीने में ही बादाम की कीमतों में ही 100 रूपये प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई है। काली इलायची के दामों में 300 रुपए और जावित्री के दामों में 400 रुपए प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। सरसों का तेल 168 रुपए से 180 रुपए और रिफाइंड 135 से 145 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सफेद इलायची तो 2600 रुपए प्रति किलो से 3400 रुपए प्रति किलो तक जा पहुंची है। यही हाल पिस्ते का भी है। मेवा व्यापारी शिवम आनंद के अनुसार खाड़ी देशों में उथल पुथल के बाद सूखे मेवे के दामों में लगातार इजाफा हो रहा है। 

उधर ट्रांसपोर्टर रामकृष्ण शुक्ला के अनुसार डीजल के दामों में वृद्धि के चलते ट्रांसपोर्ट लगातार महंगा हो रहा है जिसके चलते दूर से आने वाला माल मंडियों तक बा-मुश्किल पहुंच पा रहा है। उधर गृहणी पारुल गुप्ता और श्वेता के अनुसार रसोई गैस के दाम भी लगातार बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ गया है।

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