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Thursday, June 18, 2026

संगीत साधकों के लिए अमूल्य धरोहर बनी डॉ. शैल शर्मा की पुस्तक ‘बंदिशें तंत्र वाद्यों की बंदिशें’ सुभारती विश्वविद्यालय में हुआ भव्य विमोचन

नित्य संदेश ब्यूरो 

मेरठ। संगीत शिक्षा और भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सीबीएसई राष्ट्रीय पुरस्कार (2019) से सम्मानित प्रख्यात संगीतविद् डॉ. शैल शर्मा द्वारा स्वरचित पुस्तक बंदिशें तंत्र वाद्यों की बंदिशें (स्वर लिपियाँ) का भव्य विमोचन सुभारती ग्रुप के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण द्वारा किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ, जिसमें संगीत एवं शिक्षा जगत से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित गणमान्य उपस्थित रहे।


इस अवसर पर रंजना करियाना, मोनिका गुप्ता, प्रो. (डॉ.) पिटूँ मिश्र, डॉ. भावना ग्रोवर, निशी चौहान, डॉ. श्वेता चौधरी एवं डॉ. दीपक की विशेष एवं गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने पुस्तक के प्रकाशन को भारतीय शास्त्रीय संगीत के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं संगीत साधकों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी बताया। पुस्तक की लेखिका डॉ. शैल शर्मा ने बताया कि इस कृति में भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को सरल एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में 24 प्रमुख रागों का संक्षिप्त, सारगर्भित एवं व्यावहारिक परिचय दिया गया है, जिससे विद्यार्थी रागों की मूलभूत संरचना और विशेषताओं को सहजता से समझ सकें। इसके अतिरिक्त पुस्तक में वीणा, सितार, वायलिन, सरोद, सारंगी आदि तंत्र वाद्यों पर प्रस्तुत की जाने वाली मसीतखानी गत, रजाखानी गत तथा विविध प्रकार की तानों का विस्तृत संकलन किया गया है। स्वर लिपियों के माध्यम से इन बंदिशों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास विद्यार्थियों और कलाकारों को अभ्यास एवं मंचीय प्रस्तुति दोनों में उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करेगा।



सुभारती ग्रुप के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने शुभकामना संदेश में कहे की, डॉ. शैल शर्मा को इस महत्वपूर्ण साहित्यिक एवं संगीतात्मक योगदान के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए, और कहे की भारतीय शास्त्रीय  संगीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसी पुस्तकों के माध्यम से संगीत की परंपरा नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुँचेगी तथा विद्यार्थियों को प्रामाणिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक संगीत शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में स्थापित होगी।



वहीं प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्र ने अपने शुभकामना संदेश में कहे की संगीत केवल कला नहीं, बल्कि साधना और संस्कृति का जीवंत स्वरूप है। डॉ. शैल शर्मा द्वारा तैयार की गई यह पुस्तक संगीत विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने पुस्तक के सफल प्रकाशन पर हार्दिक बधाई देते हुए इसके व्यापक उपयोग और लोकप्रियता की कामना की। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अतिथियों ने डॉ. शैल शर्मा के इस रचनात्मक प्रयास की सराहना करते हुए इसे भारतीय शास्त्रीय संगीत के अध्ययन-अध्यापन में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर सृजनात्मक कार्यों के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं।

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