नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। 6 मुहर्रम को शहर के सभी इमामबाड़ों में इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में मजलिस , मातम व जुलूस का सिलसिला जारी रहा। लाला बाजार स्थित इमामबारगाह छोटी कर्बला में मौलाना सैयद अब्बास बाकरी ने " इमामत, ईलाही निज़ाम - ए - हयात " शीर्षक से मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि " आज पूरी दुनिया में इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में मनाई जा रही है। जिन्होंने उस समय की ताकतवर यज़ीदी सरकार के आगे झुकने के बजाय सच्चाई और न्याय का रास्ता चुना और इंसानियत को सिखाया कि ज़ुल्म के आगे कभी नहीं झुकना चाहिए। इमाम हुसैन की हिम्मत और बहादुरी ने दुनिया की दबी कुचली कौमों को हिम्मत और ताकत दी है। उन्होंने आगे कहा कि कर्बला का यह संदेश आज भी दुनिया के दबे-कुचले देशों के लिए रोशनी की किरण है।"
आज की मजलिस में मौलाना ने इमाम हुसैन के जवान बेटे जो पैगंबर मोहम्मद (स) की शक्ल थे की शहादत का बयान किया मजलिस में उपस्थित सोगवार सीना और सर पीटते हुए रोये और फज़ा "या अली अकबर" और "या हुसैन" के नारों से गूंज उठी । मजलिस में सोज़ ख्वानी सैय्यद रजी उल-हसनैन और बिरादरान नें की।
नमाज ज़ौहरैन के बाद, मौलाना मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी ने अज़ा खाना शाह - ए - कर्बला वक्फ मंसबिया में अपने शीर्षक से"इमामत और कुरान " के तहत मजलिस को संबोधित किया। मौलाना ने इमाम हुसैन के जवान बेटे हज़रत अली अकबर की शहादत का बयान किया, जो पवित्र पैगंबर (स.अ) की छवि थे, जिसे सुनकर मजलिस में उपस्थित अज़ादार खूब रोये। सोज़ ख्वानी अमल अब्बास ने की।
मजलिस में बड़ी संख्या में मोमिनीन शामिल हुए और हज़रत फातिमा को हज़रत अली अकबर का पुरसा दिया। शहर के अन्य इमामबाड़ों में निर्धारित समय पर मजलिसों और मातम का सिलसिला जारी रहा। मुहर्रम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत जकिया ने बताया, " मनसबिया की मजलिस के बाद थाना कोतवाली स्थित पेड़ामल बाजार की इमामबारगाह तकी हुसैन से जुलूस ए जुल्जनाह बरामद हुआ जो खंदक बाजार से होता हुआ जाहिदियान की इमामबारगाहों में पहुंचा। वहां से सत्यम पैलेस रोड से होता हुआ खैरनगर स्टेट बैंक की इमामबारगाह पहुंचा उसके बाद छत्ता बुर्जियान के इमामबारगाह से गुजरता हुआ लाला बाजार स्थित इमामबारगाह छोटी कर्बला पहुंचा। वहां पर शहर की सभी मातमी अंजुमनों ने नौहा ख्वानी और मातम किया।
इसके बाद जुलूस अख्तर मस्जिद से होता हुआ अहमद रोड और खैरनगर से गुजर कर इमामबारगाह तकी हुसैन वापस आकर समाप्त हुआ। जुलूस के संयोजक अफसर काजमी थे। जुलूस में शहर की तमाम मातमी अंजुमनों ने नौहे पढ़े और मातम किया।
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