नित्य संदेश। आज का दिन विशेष है। योग प्रशिक्षिका डॉ मंजु गुप्ता ने 12 वां अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आर्यसमाज, वाशी नवी मुंबई में प्रतिभागियों के साथ विभिन्न योगासन किये। योग स्वस्थ जीवन का आधार है। योग से हम तन मन को स्वस्थ बनाते हैं और संग में व्यक्तित्व का विकास करते हैं । जिसमे मानव के कल्याण की भावना होती है। बीमारियां दूर करने का इलाज योग में होता है। योग करना हर स्त्री , बच्चा , बड़े छोटे ,बड़े युवा और बुजुर्ग इन सभी के लिए लाभदायक है। योग शिक्षिका डॉ मंजु गुप्ता ने टाटा विद्युत गार्डन में रोज की तरह सुबह की सैर करने वालों को योग करवाया ।
योग का अर्थ है जुड़ना । हम योग साधना के ध्यान से परमात्मा से जुड़ सकते हैं । योगी ध्यानियों ने योग विद्या से परमात्मा से जुड़े । उनसे साक्षात्कार किया।अर्थात व्यक्तिगत चेतना का सार्वभोमिक चेतना के साथ एकाकार होता है . योग करने से मनुष्य शारीरिक , मानसिक , संवेगात्मक, अध्यात्मिक विकास करता है . जिससे उसमें मानसिक शान्ति , साकारात्मकता , स्फूर्ति आती है . कवि कालिदास जी ने कहा है - "शरीर माद्यं खलु धर्म साधनम . "अर्थात धर्म का सर्वप्रथम साधन स्वस्थ शरीर है . उक्ति भी है - 'स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और आत्मा का वास होता है . योग संस्कृति शब्द युंज से बना है . इसका अर्थ आपसी मेल - जोल है और मिलन यानी लीन हो जाना . योग किसी एक धर्म से संबंधित नहीं है . बलकी योग शारीरिक , मानसिक, भावनात्मक , आत्मिक , आध्यात्मिक व्यायाम और जीवन जीने की कला है . जिसके द्वारा हमारे शरीर के सारे हानिकारक , विषैले पदार्थ बहार निकल जाते हैं और हमारे शरीर के आंतरिक अवयव , मांसपेशियां , हड्डी आदि मजबूत होती हैं . तन - मन को स्वास्थ , निरोगी बनाता है . सभी प्रकार के दुखों से छुटकार पा लेता है . योग की विविध क्रियाओं और यौगिक आसनों के द्वारा शरीर का कचरा , नकारात्मक भाव को नष्ट करता है और मैत्री , अहिंसा , प्रेम करुना , कल्याण जैसे सदगुण आत्मा में पुष्पित होते हैं ।
प्राचीन भारत में एक घाट पर शेर और बकरी पानी पिया करते थे . मानवीय मूल्यों से योग करने वाला इंसान जुड़ जाता है . योगियों के प्रशिक्षण , सात्विक वृतियों के कारण द्वेष - वैर भाव वाले प्राणियों में मैत्री हो जाती है . योग के द्वारा नकारात्मक भाव जैसे क्रोध , द्वेष , नफरत , राग आदि भाव ख़त्म हो जाते हैं . योग के द्वारा शरीर में वायु , पित्त , कफ जैसी विकृतियों को दूर कर के संतुलन ला सकते हैं .
शिवपुराण के अनुसार भगवान शंकर योग के जन्मदाता हैं। द्वापर युग प्रभु कृष्ण योगेश्वर के नाम से जाने जाते हैं। महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित रूप दिया। आधुनिक समय में इसे पूरी दुनिया में फैलाने में स्वामी विवेकानंद और अन्य भारतीय योग गुरुओं, स्वामी रामदेव और भारत के प्रधानमंत्री आ नरेंद्र मोदी को श्रेय जाता है। योग हमें वसुधैव कुटुंबकम के भाव से जोड़ता है। देश , विश्व को योग दिवस की शुभकामनाएं हैं।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई।
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