Monday, May 4, 2026

“गुजरात की रंगीन संस्कृति, विद्यार्थियों की सृजनात्मकता और आत्मनिर्भरता का सुंदर संगम — ‘बापू बाज़ार’ बना आकर्षण का केंद्र, जहाँ हर स्टॉल ने कला, परंपरा और उत्साह की अनूठी कहानी बयां की”

"गुजरात दिवस के अंतर्गत बापू बाज़ार का भव्य समापन"

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। आनंदीबेन पटेल (राज्यपाल उत्तर प्रदेश) के निर्देशानुसार एवं कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला की प्रेरणा से आयोजित "गुजरात दिवस' कार्यक्रम के अंतर्गत “बापू बाज़ार” का भव्य समापन आज विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल यादव जी के कर-कमलों द्वारा संपन्न किया गया।

कार्यक्रम की संयोजिका प्रोफेसर अलका तिवारी, समन्वयक ललित कला संस्थान ने मुख्य अतिथि डॉ. अनिल यादव का स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि बापू बाज़ार का शुभारंभ 30 अप्रैल 2026 को कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला द्वारा किया गया था। 30 अप्रैल से 4 मई 2026 तक आयोजित इस पाँच दिवसीय बापू बाज़ार में विद्यार्थियों एवं आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जमकर खरीदारी की। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करते हैं तथा उन्हें भारतीय संस्कृति के विविध आयामों से जोड़ते हैं।
इस अवसर पर बापू बाज़ार में गुजरात की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं की अद्भुत झलक देखने को मिली। विशेष रूप से कच्छ की लिप्पन कला, गुजरात का मिरर वर्क, बंधेज एवं अन्य हस्तशिल्पों को विद्यार्थियों द्वारा अत्यंत आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया। ललित कला संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा निर्मित इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों में गुजरात की सजीव संस्कृति स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

इसके साथ ही गुजरात के प्रसिद्ध व्यंजनों जैसे ढोकला, फाफड़ा, खांडवी, पात्रा, जलेबी आदि के स्टॉल भी लगाए गए, जहाँ विद्यार्थियों एवं आगंतुकों ने स्वाद का भरपूर आनंद लिया। गुजराती वेशभूषा में सजी छात्राओं द्वारा संचालित स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, जहाँ लोगों ने उत्साहपूर्वक खरीदारी की।

समापन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. अनिल यादव (कुलसचिव) ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को न केवल भारतीय संस्कृति से जोड़ते हैं, बल्कि उनमें उद्यमिता, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता की भावना को भी सशक्त करते हैं। उन्होंने ललित कला संस्थान के विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता बनाए रखने पर बल दिया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा बापू बाज़ार में स्टॉल लगाने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. शालिनी धमाल, डॉ. पूर्णिमा वशिष्ठ, डॉ. रीता सिंह, दीपांजलि, कृतिका, मोहम्मद खालिद, शिल्पी शर्मा, शालिनी त्यागी एवं सुदेश का विशेष योगदान रहा। पूरे आयोजन ने न केवल गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया, बल्कि विद्यार्थियों की सृजनात्मकता, कौशल और उत्साह को प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया।

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