नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। सीसीएसयू की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला के दिशा-निर्देशन में तथा शासनादेश के अनुपालन में ललित कला संस्थान एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित निबंध प्रतियोगिता का विषय “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” रखा गया, जिसमें 42 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। निबंध प्रतियोगिता में
प्रथम पुरस्कार , , विनीता गुप्ता- एम.एफ.ए. ड्राइंग एंड पेंटिंग *
द्वितीय पुरस्कार* शिवा एमएफए अप्लाइड आर्ट
तृतीय पुरस्कार प्रियांशी गुप्ता बी.एफ.ए. चतुर्थ सेमेस्टर ड्राइंग एंड पेंटिंग को प्रदान किया गया।
इसी क्रम में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में 40 छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता में
प्रथम पुरस्कार पूजा शर्मा,एम.एफ.ए. ड्राइंग एंड पेंटिंग चतुर्थ सेमेस्टर
, द्वितीय पुरस्कार आंचल उज्ज्वल एम.एफ.ए. ड्राइंग एंड पेंटिंग चतुर्थ सेमेस्टर
तृतीय पुरस्कार - मेघा मंडल एम.एफ.ए. ड्राइंग एंड पेंटिंग चतुर्थ सेमेस्टर को प्रदान किया गया। छात्राओं ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से सोमनाथ मंदिर की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक गरिमा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
रंगोली प्रतियोगिता में छात्राओं ने समूह में मिलकर मनमोहक फूलों से सुसज्जित सोमनाथ मंदिर की आकर्षक रंगोली तैयार की। इस रंगोली को स्वरूप प्रदान करने में रोहित, तुषार, यशी, एंजेल, अदिति, आयुषी, अक्षरा, अंतर आदि छात्र-छात्राओं का विशेष योगदान रहा। उक्त सभी प्रतियोगिताओं का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री अनिल यादव तथा साहित्यिक-सांस्कृतिक परिषद के समन्वयक प्रोफेसर के.के. शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की संयोजिका प्रोफेसर अलका तिवारी ने उपस्थित छात्राओं एवं आगंतुक शिक्षकगणों को संबोधित करते हुए सोमनाथ मंदिर की स्थापत्य कला, चित्रकला एवं मूर्तिकला की विशेषताओं पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं कला परंपरा में सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. रीता सिंह, डॉ. पूर्णिमा वशिष्ठ, डॉ. शालिनी धामा, सुश्री कृतिका, दीपांजलि, मोहम्मद खालिद, शिल्पी शर्मा, शालिनी त्यागी, सुदेश कुमार आदि का अतुलनीय योगदान रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा मिला।

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