Wednesday, May 13, 2026

शोभित विश्वविद्यालय में “लीगल ड्राफ्टिंग” पर एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। शोभित विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ एंड कॉन्स्टिट्यूशनल स्टडीज द्वारा “लीगल ड्राफ्टिंग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड श्री सूर्यानाथ पांडेय एवं दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री हिमांशु जैन उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के प्रारंभ में एसएलसीएस के निदेशक प्रो. (डॉ.) ए.के. शर्मा ने दोनों वक्ताओं का पटका पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, "विधिक ड्राफ्टिंग विधि शिक्षा की रीढ़ है। यह केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि तथ्यों को कानून के सांचे में ढालकर न्याय प्रदान करने की कला है, जिसका ज्ञान प्रत्येक विधि छात्र के लिए अनिवार्य है।" सूर्यानाथ पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि सभी विधि विद्यार्थियों के लिए लेखन पर ध्यान केंद्रित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन लेखन का अभ्यास करने और अपने लेखन का स्वयं परीक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अभिवचन लिखने से पूर्व एक कनिष्ठ अधिवक्ता के रूप में आपको अपने अभिवचन में लागू होने वाले कानून का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना चाहिए, क्योंकि एक बार अभिवचन का प्रारूप तैयार हो जाने के बाद वह अंतिम रूप से उच्चतम न्यायालय तक जाता है।


हिमांशु जैन ने बताया कि विधि के छात्र के रूप में हमारा प्रथम कर्तव्य अपनी विधिक शब्दावली को समृद्ध करना है। साथ ही उन्होंने ‘कोड’ और ‘एक्ट’ के बीच का अंतर भी विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थियों के लिए अभिवचन लेखन की कला अत्यंत महत्वपूर्ण है और यही कला उन्हें सफल अधिवक्ता बनाती है।दोनों विधि विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक ड्राफ्टिंग कौशल एवं विधिक दस्तावेज़ तैयार करने की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को विधिक क्षेत्र की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई।


इस कार्यशाला में 100 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। इस अवसर पर डॉ. कुलदीप कुमार, डॉ. अनीता राठौर, डॉ. पल्लवी जैन, डॉ. ऋषि यादव, डॉ. अनुज कुमार, डॉ. मोहित किशोर भटनागर एवं डॉ. निहारिका पिलानिया सहित सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने वक्ताओं से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम का सफल समन्वयन डॉ. ऋषि यादव, सहायक प्राध्यापक, स्कूल ऑफ लॉ एंड कॉन्स्टिट्यूशनल स्टडीज द्वारा किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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