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Saturday, May 9, 2026

​पश्चिम बंगाल में "भगवा उदय": आजादी के बाद भाजपा से पहली बार मुख्यमंत्री बने शुभेंदु अधिकारी


मुख्यमंत्री पद की शपथ, कैबिनेट में क्षेत्रीय समीकरणों का दबदबा
सपना सी.पी. साहू 
नित्य संदेश, कोलकाता। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में शनिवार, 9 मई 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। कोलकाता के राजभवन में आयोजित एक भव्य गरिमामयी समारोह में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें शपथ दिलाई।

​इस शपथ ग्रहण के साथ ही बंगाल में दशकों से चले आ रहे वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस के वर्चस्व के बाद पहली बार दक्षिणपंथी विचारधारा वाली सरकार का गठन हुआ है।

कैबिनेट का गठन: अनुभवी चेहरों और युवा जोश का संगम
मुख्यमंत्री के साथ ही पांच अन्य प्रमुख नेताओं ने भी कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। भाजपा ने अपने पहले मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की स्पष्ट कोशिश की है:-

​दिलीप घोष: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के मजबूत स्तंभ।

अग्निमित्रा पॉल: महिला नेतृत्व और शहरी चेहरों का प्रतिनिधित्व।

​निसिथ प्रमाणिक: उत्तर बंगाल और युवाओं की आवाज।

​क्षुदिराम टुडू: आदिवासी समुदाय और जंगल महल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व।

​अशोक कीर्तनिया: मतुआ समुदाय और शरणार्थी हितों के प्रमुख पैरोकार।
पार्षद से मुख्यमंत्री तक: 'जायंट किलर' का सफर में
​15 दिसंबर 1970 को पूर्व मेदिनीपुर के करकुली गांव में जन्मे शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक ग्राफ निरंतर बढ़ता रहा है। उनके सफर की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

​शुरुआती दौर: 1995 में कांथी नगरपालिका से पार्षद के रूप में करियर की शुरुआत। इसके बाद वह तीन बार पार्षद और नगरपालिका अध्यक्ष रहे।

​विधायी अनुभव: 20 वर्षों से अधिक का विधायी अनुभव। वे दो बार लोकसभा सांसद और तीन बार विधायक रह चुके हैं।

​प्रशासनिक पकड़: राज्य सरकार में परिवहन और सिंचाई जैसे भारी-भरकम विभाग संभालने के साथ-साथ हुगली रिवर ब्रिज कमीशन और हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटी का सफल नेतृत्व किया।

​सहकारिता के धुरंधर: विद्यासागर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक जैसे संस्थानों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर उनकी गहरी पकड़ है।

नंदीग्राम से भवानीपुर तक: ममता बनर्जी को दी मात
​शुभेंदु अधिकारी को भारतीय राजनीति में 'जायंट किलर' की उपाधि मिली है। 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम की ऐतिहासिक सीट पर ममता बनर्जी को पराजित किया था, और ताजा 2026 के चुनावों में भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी अपराजेय छवि की पुष्टि कर दी।

​विरासत और शिक्षा
​शुभेंदु अधिकारी एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसका नाता देश की आजादी से रहा है। उनके पूर्वज बिपिन अधिकारी और केनाराम अधिकारी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल भी गए थे। शुभेंदु ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एम.ए. की डिग्री प्राप्त की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री शिशिर अधिकारी के पुत्र होने के नाते राजनीति उन्हें विरासत में मिली, जिसे उन्होंने अपने संघर्ष और कौशल से नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

​नया बंगाल, नई उम्मीदें
​दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु ने बंगाल में भाजपा को एक मजबूत चेहरा दिया। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने राज्य की कानून-व्यवस्था, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।

"यह जीत बंगाल की जनता की जीत है। हमारा लक्ष्य सोनार बांग्ला के संकल्प को सिद्ध करना और विकास को अंतिम पायदान तक पहुंचाना है।"
— शुभेंदु अधिकारी (शपथ ग्रहण के उपरांत)

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