मेरठ। गुरुवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद तथा ललित कला संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में गुजरात दिवस की पूर्व संध्या पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए गुजराती परंपराओं, वेशभूषा और लोक-संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में आयोजित फैशन शो में छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक गुजराती परिधानों में रैंप वॉक कर सभी का मन मोह लिया। रंग-बिरंगी वेशभूषा, आभूषणों और पारंपरिक साज-सज्जा ने सभागार को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। इसके उपरांत प्रस्तुत किए गए डांडिया रास ने पूरे वातावरण को उत्साह और उल्लास से भर दिया, जिसमें विद्यार्थियों की ऊर्जा और सांस्कृतिक जुड़ाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
इस अवसर पर तिलक पत्रकारिता एवं जनसंचार स्कूल द्वारा गुजरात की समृद्ध संस्कृति, धार्मिक विरासत और सामाजिक जीवन पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रस्तुत की गई, जिसने दर्शकों को राज्य की विविधता और सांस्कृतिक गहराई से परिचित कराया।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि गुजरात जैसे राज्य की सांस्कृतिक परंपराएं हमें यह सिखाती हैं कि आधुनिकता के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितना आवश्यक है। इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों को विभिन्न राज्यों की संस्कृति से परिचित कराते हैं, बल्कि उनमें राष्ट्रीय एकता, आपसी सम्मान और सांस्कृतिक समरसता की भावना को भी प्रोत्साहित करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों और परंपराओं के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण मंच है। आज के वैश्वीकरण के दौर में जब युवा पीढ़ी तेजी से बदलती जीवनशैली के प्रभाव में है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना का भी विकास होता है।
कुलपति ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद और ललित कला संस्थान ने जिस समर्पण और सृजनात्मकता के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने विद्यार्थियों को इसी प्रकार विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता, समन्वयक प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा, डॉ मनोज कुमार श्रीवास्तव, डॉ अलका तिवारी, डॉ वैशाली पाटील, डॉ धर्मेंद्र कुमार सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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