Friday, March 27, 2026

एडवांस्ड जीआई और बैरिएट्रिक सर्जरी में रोबोटिक तकनीक दे रही सटीक इलाज और तेज रिकवरी का भरोसा


नित्य संदेश ब्यूरो 
मुजफ्फरनगर। दा विंची सर्जिकल सिस्टम की उपलब्धता के साथ मिनिमली इनवेसिव सर्जरी का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है, खासकर एडवांस्ड गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) और बैरिएट्रिक सर्जरी में। यह सिस्टम हाई-डेफिनिशन 3डी विज़ुअलाइजेशन और आर्टिकुलेटेड रोबोटिक इंस्ट्रूमेंट्स को मिलाकर सर्जन के हाथों की मूवमेंट को बेहतर तरीके से दोहराता और उसे और सटीक बनाता है। इसके कारण पारंपरिक लैप्रोस्कोपी की तुलना में ज्यादा प्रिसिशन, बेहतर कंट्रोल और फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।

एडवांस्ड जीआई सर्जरी में इसोफेगस, पेट, पैंक्रियाज, लिवर, कोलन और रेक्टम से जुड़े जटिल ऑपरेशन शामिल होते हैं। इन प्रक्रियाओं में शरीर के सीमित हिस्सों में बेहद सावधानी से डिसेक्शन और सटीक सिलाई या रिकंस्ट्रक्शन की जरूरत होती है।

मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत जनरल सर्जरी, लैप्रोस्कोपिक / मिनिमल एक्सेस सर्जरी, डिपार्टमेंट ऑफ जनरल सर्जरी एंड रोबोटिक्स के कंसल्टेंट,डॉ. शलभ अग्रवाल ने बताया इसोफेगस कैंसर के लिए रोबोटिक-असिस्टेड इसोफेगेक्टॉमी इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहां बेहतर विज़ुअलाइजेशन और लचीले इंस्ट्रूमेंट्स महत्वपूर्ण संरचनाओं जैसे एओर्टा और ट्रेकिआ के आसपास सुरक्षित डिसेक्शन में मदद करते हैं। इसी तरह, गैस्ट्रिक कैंसर सर्जरी में रोबोटिक गैस्ट्रेक्टॉमी के जरिए लिम्फ नोड डिसेक्शन (डी2 लिम्फैडेनक्टॉमी) अधिक सटीक तरीके से किया जा सकता है, जो कैंसर कंट्रोल के लिए बेहद जरूरी है। कोलोरेक्टल सर्जरी, खासकर रेक्टल कैंसर में लो एंटीरियर रिसेक्शन के दौरान, पेल्विस का सीमित स्पेस पारंपरिक लैप्रोस्कोपी को चुनौतीपूर्ण बनाता है। यहां दा विंची सिस्टम के आर्टिकुलेटेड इंस्ट्रूमेंट्स बेहतर मूवमेंट और नर्व प्रिजर्वेशन में मदद करते हैं, जिससे सर्जरी के बाद यूरिन और सेक्सुअल फंक्शन बेहतर रहने की संभावना बढ़ती है।

हेपेटोबिलियरी और पैंक्रियाटिक सर्जरी जैसे डिस्टल पैंक्रियाटेक्टॉमी, व्हिपल प्रोसीजर और लिवर रिसेक्शन में भी रोबोटिक प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ रहा है। इन ऑपरेशनों में बड़े ब्लड वेसल्स के पास काम करना होता है, जहां उच्च स्तर की सटीकता जरूरी होती है। रोबोटिक सिस्टम स्थिर कैमरा कंट्रोल, ट्रेमर को कम करने और बेहतर स्यूचरिंग क्षमता के जरिए सर्जरी को अधिक सुरक्षित बना सकता है और कुछ मामलों में ब्लड लॉस भी कम कर सकता है।

डॉ. शलभ ने आगे बताया कुल मिलाकर, एडवांस्ड जीआई सर्जरी में यह सिस्टम सर्जन के लिए बेहतर एर्गोनॉमिक्स प्रदान करता है, ओपन सर्जरी में कन्वर्जन की संभावना को कम कर सकता है और सही मरीजों में तेजी से रिकवरी व कम हॉस्पिटल स्टे में मदद करता है। बैरिएट्रिक सर्जरी मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों जैसे टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी और रॉक्स एन वाई गैस्ट्रिक बायपास प्रमुख प्रक्रियाएं हैं। स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी में रोबोटिक सिस्टम पेट के बड़े हिस्से के साथ सटीक डिसेक्शन और समान आकार का गैस्ट्रिक स्लीव बनाने में मदद करता है। मोटापे वाले मरीजों में जहां पेट की दीवार मोटी और फैट ज्यादा होता है, वहां बेहतर विज़ुअलाइजेशन सर्जरी को आसान बनाता है।

रॉक्स एन वाई गैस्ट्रिक बायपास में गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी और जेजुनोजेजुनोस्टॉमी जैसे जटिल जोड़ बनाने में रोबोटिक सहायता विशेष रूप से फायदेमंद होती है। इसके आर्टिकुलेटेड इंस्ट्रूमेंट्स से सटीक स्यूचरिंग संभव होती है, जिससे लीक जैसी जटिलताओं का जोखिम कम हो सकता है।

रीविजनल बैरिएट्रिक सर्जरी, जहां पहले की सर्जरी के कारण एडहीजन्स और बदली हुई एनाटॉमी होती है, वहां भी यह तकनीक काफी मददगार साबित होती है। सुपर-ओबेस मरीजों (बीएमआई 50 किलोग्रामपरमीटर से अधिक) में भी रोबोटिक सर्जरी पारंपरिक लैप्रोस्कोपी के मुकाबले बेहतर कंट्रोल और आसानी प्रदान करती है। दा विंची सर्जिकल सिस्टम के प्रमुख फायदे हैं-बेहतर 3डी विज़न, ट्रेमर कंट्रोल, उच्च स्तर की सटीकता, और सर्जन के लिए बेहतर एर्गोनॉमिक्स।

आज के समय में यह सिस्टम एडवांस्ड जीआई और बैरिएट्रिक सर्जरी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि इसके परिणाम उच्च गुणवत्ता वाली लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के समान होते हैं, लेकिन जटिल मामलों में रोबोटिक तकनीक अतिरिक्त तकनीकी लाभ प्रदान करती है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और भी व्यापक होने की संभावना है।

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