Breaking

Your Ads Here

Tuesday, March 17, 2026

“कांशीराम जी एवं महिला सशक्तिकरण” विषय पर एक राष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन


नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कांशीराम शोध पीठ के तत्वाधान में कांशीराम के जन्मदिवस के अवसर पर “कांशीराम जी एवं महिला सशक्तिकरण” विषय पर एक राष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम का उद्देश्य कांशीराम के सामाजिक न्याय, समानता एवं महिला सशक्तिकरण संबंधी विचारों को समकालीन संदर्भ में समझना एवं उनका मूल्यांकन करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता मान्यवर कांशीराम शोध पीठ के निदेशक प्रो. दिनेश कुमार द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने कहा कि कांशीराम जी का संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि महिला सशक्तिकरण किसी भी समाज की प्रगति का आधार है, और जब तक महिलाओं को शिक्षा, प्रतिनिधित्व एवं संसाधनों में समान भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक समावेशी विकास की परिकल्पना अधूरी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक न्याय की अवधारणा को तकनीकी प्रगति के साथ जोड़कर देखना आवश्यक है, ताकि विकास के लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकें।
गोष्ठी में प्रो. अल्पना अग्रवाल ने कहा कि कांशीराम जी ने महिलाओं की भागीदारी को सामाजिक परिवर्तन का मूल आधार माना। प्रो. अनीता राठी ने शिक्षा को महिला सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी साधन बताया। प्रो. विघ्नेश त्यागी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक बताया। प्रो. सतीश प्रकाश ने समावेशी समाज के निर्माण में कांशीराम जी के योगदान को रेखांकित किया, जबकि डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी ने महिला सशक्तिकरण को सतत विकास के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कांशी राम के जीवन के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की l 

प्रो. ममता सिंह ने महिलाओं को सामाजिक एवं राजनीतिक दोनों स्तरों पर सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। 
इस अवसर पर “कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास मानवता के लिए सहायक होगा?” विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय एवं विभिन्न महाविद्यालयों के कुल 54 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। वाद-विवाद में पक्ष रखने वाले प्रतिभागियों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है, जिससे कार्यकुशलता एवं जीवन गुणवत्ता में वृद्धि हो रही है। वहीं विपक्ष में प्रतिभागियों ने तर्क दिया कि AI के कारण रोजगार के अवसरों में कमी, सामाजिक असमानता, डेटा गोपनीयता तथा मानवीय मूल्यों के क्षरण जैसी चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
वाद-विवाद में पक्ष के प्रतिभागियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को विकास, दक्षता एवं नवाचार का माध्यम बताया, जबकि विपक्ष के प्रतिभागियों ने रोजगार, नैतिकता एवं डेटा सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के रूप में डॉ. विजेता गौतम, डॉ. मुनेश कुमार, डॉ. कविता गर्ग, डॉ. रीटा सिंह, डॉ. गुरु शरण कांत एवं डॉ. कवि भूषण का विशेष योगदान रहा।

प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार शगुन बलियान एवं निशा रस्तोगी की टीम को प्रदान किया गया , दितीय पुरुस्कार सिल्की चौधरी एवं कुहू तथा तृतीय पुरुस्कार पवन कुमार एवं आकांशा की टीम को प्रदान किया गया l अनिकेत एवं श्रुति को सान्तवना पुरुस्कार प्रदान किया गया l 

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. विजय कुमार राम एवं डॉ. मनोज जाटव का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में डॉ. अनिल कुमार, श्री शेखर गढ़वाल एवं डॉ. प्रियंक सिरोही भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. मुनेश कुमार द्वारा किया गया। अंत में यह निष्कर्ष निकला कि कांशीराम जी के विचार आज भी सामाजिक न्याय एवं समानता की स्थापना के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग मानवता के हित में संतुलित एवं जिम्मेदारीपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही तथा सभी ने इसे अत्यंत सफल एवं सार्थक आयोजन बताया।

वाद-विवाद प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के रूप में डॉ. विजेता गौतम, डॉ. मुनेश कुमार, डॉ. कविता गर्ग, डॉ. रीटा सिंह, डॉ. गुरु शरण कांत एवं डॉ. कवि भूषण का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. विजय कुमार राम एवं डॉ. मनोज जाटव का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में डॉ. अनिल कुमार, श्री शेखर गढ़वाल एवं डॉ. प्रियंक सिरोही भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. मुनेश कुमार द्वारा किया गया। 

अंत में यह निष्कर्ष निकला कि कांशीराम जी के विचार आज भी सामाजिक न्याय एवं समानता की स्थापना के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग मानवता के हित में संतुलित एवं जिम्मेदारीपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही तथा सभी ने इसे अत्यंत सफल एवं सार्थक आयोजन बताया।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here