_शहर काजी जैनुल सालेकीन को "शान ए मेरठ "का अवार्ड से नवाजा गया
शाहीन परवीन
नित्य संदेश, मेरठ। हम खयाल फाउंडेशन के तत्वाधान में ईद के मौके पर हाजी अदिल चौधरी की सरपस्ती में एक "मुशायरा जश्न ए ईद ' के ना से लिसाड़ी गेट चौराहा स्थित हाजी अदिल चौधरी मार्केट स्थान पर आयोजित किया गया।
जिसमें अकिल मुर्तजा (राष्ट्रीय सचिव समाजवादी पार्टी) ने दीप प्रज्वलित के कार्यक्रम का आरंभ किया । मुरादनगर से आए मुख्य अतिथि वहाब चौधरी रहे जिन्होंने श्रोताओं को कहा कि हमारा भारत महान है और यहां पर सभी धर्मो और उनके पर्वों को एक साथ प्रेम भाई से मिल जुल कर मनाया जाता है । ईद भी उनमें से एक है जो इंसान को रूह तक पाकीज़ा कर देती है । हम सभी प्यार से एक दूसरे के साथ रहना चाहिए । कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर जनाब जहीर राही मुरादाबादी ने की । मुशायरे का सफल संचालन इरशाद बेताब एडवोकेट और फखरी मेरठी ने किया
इस मौके पर हम ख्याल फाउंडेशन ने एक नया अवॉर्ड शुरू किया जिसका नाम "शान ए मेरठ अवॉर्ड" रखा गया है और ये पहला "शान ए मेरठ अवार्ड 2026 " मेरठ की जानी मानी शख्सीयत काज़ी डॉक्टर जैनुस सालेकिन साहब को उनकी एडिक्शन और समाजी डेडीकेशन के लिए प्रदान किया गया । इस मौके पर हम ख्याल फाउंडेशन ने शहर की और भी शख्सियतों को " हम खयाल एक्सीलेंस अवार्ड 2026" दिया गया । वहीं मशहूर इंटरनेशन शायरा निकहत मुरादाबादी को "अंदलीब ए सुखन अवार्ड " से नवाजा गया।
"एक्सीलेंट मीडिया अवार्ड "से सियासी तक़दीर को ब्यूरो चीफ मेरठ शाहीन परवीन को नवाजा गया
इसके अलावा इंजीनियर रिफत जमाली,बसपा लीडर शाहजहां सैफी ,जुनेद फारूकी अध्यक्ष सरगम आर्ट कल्चरल सोसाइटी ,मकबूल अहमद ,शकील भारती, शहजाद उस्मान को एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया इजाजी तकरीब के बाद ग़ज़ल और शायरी का दौर शुरू हुआ जिसमें श्रोतागण कभी भाऊ विभोर तो कभी तलैया बजाते रहे और शायरों को बहुत दाद और तालियों से नवाज़ते रहे ।
हापुड़ से आए शायर जमशेद माहिर ने अपने ख़ास अंदाज में पढ़ा कि -
किसको मालूम था ये तुर्का तमाशा होगा
यक बी यक हमको मयस्सर तेरा जलवा होगा
अपनी सूरत पे न कर इतना तकब्बुर ना दा
तूने खुशीद को ढलते देखा होगा
और दौताई गढ़ से आए शायर बदरुद्दीन दानिश ने पढ़ा कि -
वो मेहरबां कभी है तो बरहम कभी-कभी।
शोला कभी-कभी है तो शबनम कभी-कभी।
कतरा के जाने वाले तुझे ये भी याद हे
खेले हैं तेरे लिए हम जां पे कभी कभी
हापुड़ से आई ओ शायरा नीलोफर नूर ने कुछ यूं पढ़ा कि -
जब रास मुझे आ ही गया हिज्र तुम्हारा ।
गुलशन में किसी ईद की मोहताज नहीं मै ।
और पढ़कर बहुत दाद वसूल की ।
और मशहूर शायर इरशाद बेताब ने जब पढ़ा कि -
सूनी आंखों को ये बादल कर देती है ।
इंसा के एहसास को घायल कर देती है ।
जीवन में जब मजबूरी के पल आते हैं ।
तो ये ज़रूरत सबको पागल कर देती है ।।
श्रोताओं बहुत देर तक तालिया बजाई अमरोहा से आए मशहूर शायर निकहत अमरोहवी ने अपने ख़ास अंदाज और खूबसूरत आवाज के साथ अपनी ग़ज़ल और गीत पढ़े जैसे कि -
मेरी गली से गुज़रते हो अजनबी की तरहा
ये इंतेक़ाम की साज़िश है इत्तेफ़ाक़ नहीं ।
तब श्रोताओं ने बहुत दाद से नवाजा ।
संचालन कर रहे शायर फाखरी मेरठी ने पढ़ा कि -
तमन्ना फायदे की थी, मगर घाटा ख़रीदा है
लहू को बेचकर मज़दूर ने आटा ख़रीदा है ।
और अंत में अध्यक्षता कर रहे शायर जहीर राही मुरादाबादी ने पढ़ा कि -
चिरागों से सीखो अंधेरों से लड़ना ।
किताबों से क्या मशवरा मांगते हो ।
और अंत में कार्यक्रम के संजयोजकों ने सभी का आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम में यशपाल चौधरी एडवोकेट , जीशान खान , अतहर अहमद काजमी, अख्तर आलम, आफताब आलम ताबो, सलीम सैफी , शाहिद चौधरी , आफाक अहमद खान अनीस अहमद , आदि उपस्थित रहे
No comments:
Post a Comment