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Monday, March 30, 2026

“भारत और कोरिया के मध्य वर्चुअल लर्निंग कंटेंट शेयरिंग” विषय पर व्याख्यान का आयोजन

 


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के शोध एवं विकास निदेशालय तथा शिक्षा विभाग द्वारा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के सहयोग से “भारत और कोरिया के मध्य वर्चुअल लर्निंग कंटेंट शेयरिंग” विषय पर एक विशेष आमंत्रित व्याख्यान का सफल आयोजन शिक्षा विभाग के सेमिनार हॉल में किया गया। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम ने डिजिटल शिक्षा के वैश्विक आयामों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. क्वांग सिक चुंग, कंप्यूटर साइंस विभाग, कोरिया नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ने अपने विस्तृत एवं प्रभावशाली व्याख्यान में वर्चुअल लर्निंग कंटेंट के निर्माण, संरचना और प्रभावी प्रसार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जैसी उभरती डिजिटल तकनीकों ने शिक्षा के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। अब शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह किसी भी समय और किसी भी स्थान पर उपलब्ध हो रही है, जिससे शिक्षार्थियों को अधिक लचीलापन और आत्मनिर्भरता प्राप्त हो रही है।



प्रो. चुंग ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि वर्चुअल लर्निंग कंटेंट केवल सूचना प्रदान करने का माध्यम नहीं, बल्कि यह इंटरैक्टिव, सहभागी और छात्र-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार मल्टीमीडिया, एनिमेशन, वर्चुअल लैब्स और इंटरैक्टिव असेसमेंट टूल्स के उपयोग से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और रोचक बनाया जा सकता है। उन्होंने भारत और कोरिया के बीच शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि दोनों देशों के पास डिजिटल एवं मुक्त शिक्षा के क्षेत्र में समृद्ध अनुभव और संसाधन हैं, जिन्हें साझा कर वैश्विक स्तर पर एक सशक्त शैक्षणिक नेटवर्क विकसित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संयुक्त शोध परियोजनाएं, फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम, सह-विकसित ऑनलाइन कोर्सेज तथा ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज (OER) के आदान-प्रदान के माध्यम से भारत और कोरिया के बीच शैक्षणिक संबंधों को और अधिक मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. बीरपाल सिंह, निदेशक, शोध एवं विकास ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति और संस्थागत विकास पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय निरंतर अपने शैक्षणिक मानकों को ऊंचा उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय रैंकिंग, शोध प्रकाशनों, पेटेंट्स और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय शोध को केवल औपचारिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास से जुड़ी एक सशक्त प्रक्रिया के रूप में देखता है। इसके लिए विश्वविद्यालय में बहुविषयक (Multidisciplinary) शोध को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि जटिल सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी समस्याओं के समग्र समाधान खोजे जा सकें।

प्रो. बीर पाल सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान और शैक्षणिक संवाद न केवल ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं, बल्कि छात्रों और शोधार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण भी प्रदान करते हैं। विश्वविद्यालय डिजिटल शिक्षा, ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) तथा ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है, ताकि शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाया जा सके।

कार्यक्रम का संयोजन प्रो. राकेश शर्मा, अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता तथा निदेशक (ओडीएल) द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर प्रो. विजय जायसवाल एवं प्रो. जितेंद्र सिंह, सह निदेशक, शोध एवं विकास भी उपस्थित रहे। डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। व्याख्यान के पश्चात आयोजित संवादात्मक चर्चा सत्र ने प्रतिभागियों को अपने विचार साझा करने और विषय से संबंधित जिज्ञासाओं के समाधान का अवसर प्रदान किया, जिससे यह सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं उपयोगी सिद्ध हुआ।

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