नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। सिप्ला ने इनहेल द चेंज शुरु किया है। यह बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन के साथ एक देशव्यापी जागरूकता पहल है। इसका मकसद इंसुलिन थेरेपी से जुड़ी भावना और व्यवहार संबंधी दिक्कतों को दूर करना है। डायबिटीज भारत की सबसे बड़ी जन स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। इसकी वजह से लोग लंबे समय तक बीमार रहते हैं और यह मौत का कारण भी बनता है। भारत में 10 करोड़ से ज़्यादा लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। इसलिए देश को अक्सर 'दुनिया की डायबिटीज राजधानी' कहा जाता है। वास्तविक जीवन की इन बाधाओं को दूर करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, सलाहकार एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. शिवेंदु भारद्वाज ने कहा समय पर इंसुलिन लेना शुरू करना गेम-चेंजर हो सकता है, लेकिन कई मरीज़ डर, गलत जानकारी या बहुत ज़्यादा भावनात्मक थकान की वजह से हिचकिचाते हैं। इनहेल द चेंज जैसी जागरूकता पहल, जो मरीज़ केंद्रित शिक्षा को चिकित्सीय जानकारी के साथ मिलाती हैं । इसे आगे बढ़ाते हुए, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनमोहन शर्मा ने कहा टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों के लिए इंसुलिन ज़रूरी है और टाइप 2 डायबिटीज वाले कई लोगों के लिए यह एक ज़रूरी थेरेपी बन जाता है। फिर भी, इंजेक्शन का डर, मुश्किल रूटीन और समाज में परेशानी जैसी रोज़मर्रा की रुकावटें अक्सर मरीज़ों को इलाज शुरू करने या उसे जारी रखने से रोकती हैं। हालांकि इंसुलिन देने के नए तरीके व्यावहारिक समाधान देते हैं, लेकिन जो चीज़ सच में फ़र्क डालती है, वह है इस तरक्की को मरीज़ से बातचीत और सपोर्ट के साथ मिलाना। इनहेल द चेंज जैसे कैंपेन खुली बातचीत की संभावना तैयार करते हैं जिससे मरीज़ों को यह महसूस होता है कि उनकी बात सुनी जा रही है, उन्हें जानकारी दी जा रही है और उन्हें मज़बूती दी जा रही है।
इंसुलिन डायबिटीज़ का प्रबंध करने के लिए के लिए सबसे प्रभावी थेरेपी में से एक है। खास तौर से टाइप 1 डायबिटीज़ वाले लोगों और टाइप 2 डायबिटीज़ वाले कई लोगों के लिए। इसके बावजूद बहुतों के लिए, इलाज के साथ रेगुलर बने रहना मुश्किल हो सकता है जागरूकता या इरादे की कमी की वजह से नहीं, बल्कि रोज के प्रबंध के भावनात्मक और व्यावहारिक कारण से। अध्ययन से पता चलता है कि डर, तनाव भूल जाने, शर्मिंदगी और रूटीन या प्राइवेसी की मुश्किलों की वजह से अक्सर खुराक छूट जाती है या देर हो जाती है। ये रुकावटें केयर या देखभाल की उन ज़रूरतों को बताती हैं जो चिकित्सीय नतीजों से आगे बढ़कर मरीज़ के अनुभव, स्वीकृति और जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान दें। इनहेल द चेंज के ज़रिए, सिप्ला इन चुनौतियों पर ध्यान दिलाना चाहती है और मरीज़ की पसंद तथा आत्मविश्वास को बढ़ावा देने वाली जानकारी तथा हर तरह की परेशानी से मुक्त रखने वाली बातचीत को बढ़ावा देना चाहती है।
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