सपना सीपी साहू
नित्य संदेश, इंदौर। लघुकथा लेखक के लिये कठिन परंतु पाठक के लिये सरल विधा है, किसी भी रचना का सृजन हमेशा ही लेखक के समक्ष विविध चुनौतियां प्रस्तुत करता है और चूंकि लघुकथा का कलेवर छोटा और अपेक्षा बड़ी होती है, यह लेखक के लिये लेखन में कठिन परंतु आकार में छोटी होने के चलते पाठक के लिए वाचन में सरल होती है।
यह विचार प्रसिद्ध कवि व साहित्यकार डॉ. आशुतोष दुबे ने साझा लघुकथा संकलन ’तीन पड़ाव जीवन’ के लोकार्पण के अवसर पर व्यक्त किये। आपने आगे कहा कि इस प्रकार के नवाचार विधा को पोषित करेंगे और इसमें वर्तमान की नयी दुनिया दिखाई देती है। आपने रचनाधर्मिता में दृश्यांकन, कल्पकता और प्रतीकात्मकता को क्रमश: तीनों लेखकों की विशेषता के रुप में निरुपित किया।
इस अवसर पर संकलन पर अपने विचार रखते हुए वरिष्ठ साहित्यकार ज्योति जैन ने संकलन के तीनों रचनाकारों क्रमश: अंतरा करवड़े, डॉ. वसुधा गाडगिल, डॉ. पुरुषोत्तम दुबे के बाल्यावस्था, यौवनावस्था और वृद्धावस्था के प्रति समर्पित रचनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा-विषय विशिष्ट पर एकाधिक साहित्यकारों द्वारा रचनाकर्म लेखन एक श्रम साध्य कार्य है।जटिल संबंधों, अनुभव और वैश्विक स्वरुप में हो रहे घटनाक्रम का कैसा प्रभाव रचनाओं में से निकलकर समाज को प्रभावित करता है, इसकी व्याख्या आपने संकलन की रचनाओं के माध्यम से की।
वीणा संवाद केन्द्र इंदौर के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में अध्यक्ष के रुप में मौजूद, श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के प्रधानमंत्री अरविंद जवलेकर ने इस नवाचार की सराहना की। इस अवसर पर तीनों रचनाकारों ने इस संकलन की रचना प्रक्रिया से संबंधित अपने अनुभव साझा करते हुए प्रतिनिधी रचनाओं का पाठ भी किया। वामा साहित्य मंच द्वारा रचनाकारो का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन किया वाणी जोशी ने और आभार प्रदर्शन किया सचिन करवड़े ने। इस अवसर पर इंदु पाराशर, दीपा व्यास, वैजयन्ती दाते, शशि निगम, तनूजा चौबे, डॉ. योगेन्द्रनाथ शुक्ल, दीपक गिरकर, सुरेश रायकवार, हरेराम वाजपेयी, राजेश शर्मा सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
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