Tuesday, January 20, 2026

लाल निशान के बाद 14/11 पर कार्रवाई, तो 239/1 पर लापरवाही क्यों?


तरुण आहुजा 
नित्य संदेश, मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद आवास विकास विभाग द्वारा शहर में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर बन रहे निर्माणों पर लाल निशान लगाकर सीलिंग व ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) की कार्रवाई की गई है। 

शास्त्री नगर स्थित आरटीओ रोड 14/11 इसका ताजा उदाहरण है, जहां लाल निशान लगाए जाने के बाद निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया।
 लाल निशान का अर्थ होता है—
👉 नियमों का उल्लंघन
👉 अवैध निर्माण की पहचान
👉 नोटिस का संकेत
👉 आगे होने वाली सीलिंग या डिमोलिशन की प्रक्रिया! 

लेकिन अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अगर कानून सबके लिए समान है, तो फिर शास्त्री नगर के ही 239/1 पर कार्रवाई क्यों नहीं? स्थानीय लोगों और प्रभावित पक्षों का कहना है कि जब 14/11 (आरटीओ रोड) और हापुड़ रोड पर लाल निशान के बाद सख्त कार्रवाई हुई, तो 239/1 को किस कानून या किस धारा (CRPC अथवा अन्य अधिनियम) के तहत छूट दी जा रही है?

सेटिंग का आरोप
सूत्रों के अनुसार, नई सड़क स्थित रामचंद्र सहाय वाली दुकान के मालिक सचिन का यह निर्माण बताया जा रहा है। जानकारी में सामने आया है कि सचिन पूर्व में भी आवास विकास अधिकारियों से कथित सेटिंग के जरिए कई अवैध निर्माण करा चुका है।

शोरूम खोलने की तैयारी?
चर्चा है कि 239/1 पर बन रहे निर्माण में किसी शोरूम को खोलने की तैयारी चल रही है। यदि यह सच है और निर्माण अवैध पाया जाता है, तो फिर जिम्मेदारी किसकी होगी?

अधिकारी पल्ला झाड़ रहे 
नए तैनात जूनियर इंजीनियर (JE) रामकिशन और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) मुकेश पाल से जब इस संबंध में सवाल किए जाते हैं, तो उनका एक ही जवाब सामने आता है—
“यह पुराने JE का मामला है, हमें इसकी जानकारी नहीं है।”
 
अब सवाल यह है कि
➡️ क्या पुराने मामलों की जिम्मेदारी नए अधिकारियों की नहीं होती?
➡️ क्या जानकारी न होना लापरवाही की श्रेणी में नहीं आता?
➡️ और सबसे बड़ा सवाल— 239/1 पर कार्रवाई कब होगी?
जनता पूछ रही है! शहरवासियों की नजर अब प्रशासन पर टिकी है। जनता जानना चाहती है कि
क्या अवैध निर्माण पर कार्रवाई चयनित लोगों तक ही सीमित रहेगी, या कानून वास्तव में सबके लिए बराबर होगा?
👉 अब देखना यह होगा कि आवास विकास विभाग 239/1 पर कब और क्या कार्रवाई करता है। या होगा सेटिंग का खेल?

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