Friday, September 5, 2025

सब्सिडी वाले उर्वरकों का बहुजनपदीय घोटाला उजागर, जांच शुरू

 


-किसानों का हक छीना गया, स्वास्थ्य पर खतरा, वकील ने की शिकायत

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठअधिवक्ता राम कुमार शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, प्रमुख सचिव कृषि को भेजे गए शिकायती पत्र के आधार पर सरकार ने अरबों रुपये के उर्वरक सब्सिडी घोटाले की जाँच प्रारम्भ कर दी है। यह घोटाला न केवल किसानों के हितों का हनन है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी गंभीर संकट है।


अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने बताया कि यूरिया डीएपी की वास्तविक कीमत लगभग 1766 है। सरकार किसानों को 1500 की सब्सिडी देती है, जिससे यह मात्र 266 में किसानों तक पहुँचना चाहिए। अमोनियम सल्फेट का बाजार मूल्य 2375 है। सरकार 1375 सब्सिडी देती है, जिससे यह केवल 1000 में किसानों को उपलब्ध होना चाहिए। वास्तविकता यह है कि केवल 25% माल ही किसानों तक पहुँचता है, शेष 75% अवैध रूप से खुले बाजार में बेचा जाता है और अरबों रुपये की फर्जी सब्सिडी हड़पी जाती है। सब्सिडी वाले उर्वरकों का उपयोग मुर्गी दाना, दूध देने वाले पशुओं के चारे, प्लाईवुड और बोर्ड उद्योग तथा एथनॉल उत्पादन इकाइयों में किया जा रहा है। इससे कैंसर, किडनी रोग, लीवर रोग व अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।



शिकायतकर्ता पर खतरा

सरकार द्वारा जाँच प्रारम्भ किए जाने के बाद अब संदिग्ध व्यापारी शिकायतकर्ता अधिवक्ता राम कुमार शर्मा पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उनकी जान-माल को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।


वकील की मांगें

एसआईटी, सीबीआई, ईडी स्तर पर उच्चस्तरीय जाँच हो। फर्जी जीएसटी और एमएफएमएस एंट्री का ऑडिट कर अरबों रुपये के घोटाले का खुलासा किया जाए। जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश सहित दोषी अधिकारियों की भूमिका की जांच कर तत्काल निलंबन हो। संदिग्ध कंपनियों का पंजीकरण निरस्त कर उनके नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जाए। पशु आहार, प्लाईवुड और एथनॉल इकाइयों में सब्सिडी उर्वरकों के उपयोग पर तत्काल रोक लगे। किसानों को उनका हक समय पर और उचित दर पर उपलब्ध कराया जाए। यह घोटाला किसानों के साथ धोखा, सरकारी खजाने की लूट और आम जनता के स्वास्थ्य पर हमला है। यदि शीघ्र और प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई तो यह घोटाला राष्ट्रव्यापी कृषि व स्वास्थ्य आपदा का रूप ले सकता है।

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