नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। दस लक्षण पर्व के नौवे दिन
उत्तम आकिंचन का पर्व दिगंबर जैन मंदिर आनंदपुरी में धूमधाम से मनाया गया।
सर्वप्रथम भगवान श्री शांतिनाथ भगवान एवं श्री चन्द्र प्रभु भगवान को पांडुकशिला
पर विराजमान कर अभिषेक तथा शांति धारा की गई।
तत्पश्चात देव शास्त्र गुरु, श्री महावीर भगवान, दस लक्षण पर्व पूजा एवं
सोलह कारण भावना पूजा की गई, उसके बाद अर्हम चक्र महामंडल विधान किया गया, जिसमें
मांडले पर 550 अर्घ समर्पित किए गए।
तत्वार्थ सूत्र के पांच अध्याय के अर्घ अर्पित किए गए। सभी क्रियाएं पंडित नंदन
शास्त्री द्वारा संपन्न कराई गई। शाम को सामूहिक आरती की गई, उसके बाद पंडित नंदन
शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि अकिंचन धर्म का अर्थ होता है, मेरा
किंचित मात्र भी कुछ नहीं है। यह जीव इस संसार में खाली हाथ आया है और खाली हाथ
चला जाता है। सारी जिंदगी तरह-तरह के वस्त्र बदलता रहता है,
लेकिन जब वापस जाता है तो एक ही वस्त्र में उसको शमशान तक ले जाया जाता है। यदि आप
राजा भी हैं तो भी आपके मन में यह भावना आना कि मैं अपने दुश्मन का भला कैसे करूं, यह उत्तम अकींचन्य धर्म है।
इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम " नाचे देव इन्द्र" का मंचन हुआ।
कार्यक्रम में 50 बच्चों ने उत्साह के
साथ भाग लिया, सभी को पारितोषिक
प्रदान किया गया। कार्यक्रम में सुनील जैन प्रवक्ता, विनय जैन, शैलेंद्र जैन, सत्येंद्र जैन एवं संजीव
जैन आदि ने सहयोग किया।

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