Monday, September 22, 2025

नवरात्र, बदलता मौसम और स्वास्थ्य

नित्य संदेश। नवरात्र केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य विज्ञान के अनुसार भी इनका विशेष महत्व है। साल में दो बार आने वाले नवरात्र वास्तव में मौसम के बदलाव के संकेतक होते हैं। इस समय प्रकृति हमें बताती है कि हमें अपने शरीर और खान-पान में परिवर्तन कर उसे नए मौसम के अनुरूप ढालना चाहिए।

नवरात्रों में प्राचीनकाल से ही उपवास और हल्के भोजन का प्रचलन रहा है। जब मौसम बदलता है तो शरीर की पाचन शक्ति अपेक्षाकृत कमजोर हो जाती है। ऐसे समय में हल्के व सात्विक भोजन का सेवन पाचन तंत्र को सुचारू बनाए रखता है और शरीर को बीमारियों से बचाता है।

नवरात्रों में अपनाने योग्य आहार और आदतें

1. नौ दिनों में भोजन की मात्रा को कम रखें।
2. अधिक से अधिक **मौसमी फल और सब्जियों** का सेवन करें।
3. **बाज़ार से बने खाद्य पदार्थ** और पैक्ड फूड से दूरी बनाएं।
4. **तले-भुने खाद्य पदार्थों** का सेवन बिल्कुल न करें।
5. अधिक से अधिक समय **वॉटर फास्टिंग** करें।
6. जब तक संभव हो केवल **सादा पानी** पिएं – चाय, कॉफी और अन्य पेय पदार्थों से परहेज करें!

प्राचीन परंपराओं और विज्ञान दोनों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में जागना अत्यंत लाभकारी है। इस समय नंगे पैर चलना, ध्यान और हल्का व्यायाम करना शरीर और मन दोनों के लिए उत्तम है। यह आदत न केवल आपको ऊर्जावान बनाती है बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती है।

अनुभव और परंपरा बताती है कि यदि नवरात्रों के दौरान खान-पान और जीवनशैली का सही ध्यान रखा जाए तो शरीर स्वस्थ रहता है और अगले नवरात्र तक रोगों से सुरक्षा बनी रहती है। नवरात्र केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने का अवसर भी है।

प्रस्तुति
प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान
संस्थापक – साइक्लोमैड फिट इंडिया 

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